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Holika Dahan की अग्नि में क्यों डाले जाते हैं उपले और पुराना सामान? जानिए परंपरा के पीछे की मान्यता और विज्ञान

Holika Dahan
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Holika Dahan : होली सिर्फ गुलाल और अबीर का उत्सव नहीं है। रंगों से एक दिन पहले होने वाला Holika Dahan दरअसल आत्मशुद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस रात गांव-मोहल्लों में लकड़ियां सजाई जाती हैं, उपलों की माला चढ़ाई जाती है और अग्नि प्रज्वलित की जाती है। सवाल यह उठता है कि आखिर इस अग्नि में पुराना सामान और गोबर के उपले ही क्यों डाले जाते हैं?

मान्यता है कि होलिका दहन की आग बुराइयों के अंत का प्रतीक है। घर में पड़ी टूटी-फूटी चीजें, सूखी लकड़ियां या अनुपयोगी सामान केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि हमारे जीवन की जमी हुई नकारात्मकता का संकेत मानी जाती हैं।

Holika Dahan की अग्नि

इन्हें अग्नि को समर्पित करना यह दर्शाता है कि हम पुरानी शिकायतें, आलस्य और कड़वाहट छोड़कर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। यही कारण है कि इस परंपरा को नई शुरुआत की रस्म भी कहा जाता है। होलिका दहन में गाय के गोबर से बने उपलों का विशेष महत्व है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, यह अनुष्ठान भक्त प्रह्लाद की आस्था और बुराई के अंत की याद दिलाता है। कई परिवारों में परंपरा है कि हर सदस्य के नाम का एक-एक उपला अग्नि में अर्पित किया जाता है, जिसे ‘सुरक्षा कवच’ का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार पर आई विपत्तियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

वैज्ञानिक नजरिया भी दिलचस्प

होली का समय मौसम बदलने का होता है। सर्दी से गर्मी की ओर बढ़ते इस दौर में वातावरण में कीटाणु और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। जब गोबर के उपले, घी, कपूर और सूखी लकड़ियां एक साथ जलती हैं तो उससे निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध करने में मददगार माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे प्राकृतिक कीटाणुनाशक के रूप में भी देखा जाता रहा है।

पुराने समय में होली से पहले घरों और गलियों की विशेष सफाई की जाती थी। सर्दियों में जमा कचरा और बेकार वस्तुएं इकट्ठा कर जलाई जाती थीं। इससे न केवल स्वच्छता बनी रहती थी, बल्कि सामूहिक रूप से पवित्रता का भाव भी मजबूत होता था।

सावधानी भी जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि परंपरा निभाते समय प्लास्टिक, रबर या सिंथेटिक सामग्री अग्नि में न डालें, क्योंकि इससे जहरीला धुआं निकल सकता है। पवित्र अग्नि के आसपास स्वच्छता बनाए रखें और केवल प्राकृतिक सामग्री का ही उपयोग करें। होलिका दहन केवल रस्म नहीं, बल्कि आत्ममंथन और शुद्धि का अवसर भी है।

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