Holi 2026 : फागुन की हवा चलते ही गांवों में होली की आहट साफ सुनाई देने लगती है। कच्चे आंगन में औरतें सुबह-सुबह गुजिया बेलती हैं, कढ़ाई में खौलता घी और चाशनी की खुशबू पूरे घर में फैल जाती है। बच्चे पिचकारी की जिद करते हैं तो बुजुर्ग चौपाल पर बैठकर फाग गाते हैं। कहीं ढोलक की थाप है, तो कहीं चंग की आवाज। रसोई में दही बड़े, मालपुए और नमकीन की तैयारी चलती है। गांव की होली सिर्फ रंगों का खेल नहीं, बल्कि मिल-बैठकर रिश्तों को फिर से ताजा करने का मौका है। इसी पारंपरिक रंग के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में होली की अपनी-अपनी मान्यताएं भी हैं।
उत्तर भारत में होली को प्रह्लाद और होलिका की कथा से जोड़ा जाता है, लेकिन दक्षिण भारत में यह पर्व एक अलग संदेश देता है। यहां होली भगवान शिव और कामदेव की कथा से जुड़ी मानी जाती है। इसे अहंकार के अंत और आत्मसंयम की जीत का प्रतीक माना जाता है। कर्नाटक में 4 मार्च, बुधवार को होली का पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।
Holi पर रंग नहीं, राख की होली
कर्नाटक का Ramalingeshwara Kamanna Temple देश के बाकी मंदिरों से अलग पहचान रखता है। यह दक्षिण भारत का पहला मंदिर माना जाता है, जहां गर्भगृह में भगवान शिव और कामदेव एक साथ विराजमान हैं। आमतौर पर शिवलिंग की स्थापना अलग होती है, लेकिन यहां कामदेव की प्रतिमा शिवलिंग के समीप ध्यान मुद्रा में स्थापित है। यही वजह है कि होली के दिन यहां दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
पौराणिक कथा
मान्यता है कि देवी सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव गहन तपस्या में लीन हो गए थे। सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा तो देवताओं ने कामदेव से मदद मांगी। कामदेव ने शिव की तपस्या भंग करने के लिए कामबाण चलाया। तपस्या टूटते ही भगवान शिव ने क्रोधित होकर तीसरा नेत्र खोला और कामदेव भस्म हो गए। कहा जाता है कि कामदेव को अपनी शक्तियों पर घमंड था, और यह घटना अहंकार के अंत का प्रतीक बन गई।
राख की परंपरा क्यों?
इसी कथा की याद में इस मंदिर में होली के दिन श्रद्धालु माथे पर राख लगाते हैं। यह राख कामदेव के भस्म होने की प्रतीक मानी जाती है। काशी की तरह यहां भी राख से होली खेलने की परंपरा है। भक्त मानते हैं कि इससे अहंकार का नाश होता है और जीवन में विनम्रता आती है। रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर में होली का आयोजन सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि पूरे पांच दिन चलता है। हर दिन अलग-अलग अनुष्ठान होते हैं। शिव और कामदेव को चांदी की वस्तुएं अर्पित की जाती हैं, जिनमें चांदी का पालना विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि संतान की इच्छा रखने वाले दंपत्ति यदि होली के दौरान चांदी का झूला चढ़ाते हैं, तो उनकी मनोकामना पूरी होती है।
(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Headlines India News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)
Read More : Holi 2026: आर्टिफिशियल रंगों से पहुंच सकता है नुकसान




