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दिल्ली के लाल किले में ऐतिहासिक फैसला, UNESCO ने दिवाली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में किया शामिल

UNSECO Diwali
UNSECO Diwali

UNESCO Intangible Heritage List : दिल्ली के लाल किले में इन दिनों यूनेस्को की विशेष बैठक चल रही है, जिसमें दिवाली को आधिकारिक तौर पर UNESCO की इंटेंजिबल कल्चरल हेरिटेज (ICH) सूची में शामिल कर लिया गया है। बता दें कि यह बैठक 13 दिसंबर तक चलेगी।

भारत में दिवाली बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। यह रोशनी, उम्मीद और मिलन का ऐसा मौका होता है, जब लोग अपने पुराने सारे गिले-सिकवे भूल जाते हैं और एक-दूसरे को माफ करके रिश्ते की नई शुरूआत करते हैं। उत्तर से लेकर दक्षिण… पूर्व से लेकर पश्चिम तक… देश के हर कोने में लोग इसे अपने अंदाज से मनाते हैं। इस दिन घर, मंदिर, आंगन को रंग-बिरंगी लाइटों से सजा दिया जाता है। दिवाली से पहले घरों की साफ-सफाई की जाती है। खासकर इस दिन घरों में लजीज पकवान बनाए जाते हैं। बच्चे सुबह से लेकर शाम तक तरह-तरह के पटाखें फोड़ते हैं। वहीं, शाम के समय पूजा-पाठ के साथ ही लक्ष्मीजी का आशीर्वाद लिया जाता है। ऐसे में भारत के इस त्योहार को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है।

दिल्ली में UNESCO की बैठक

बता दें कि यह फैसला भारत के लिए सम्मान की बात है। दरअसल, पहली बार देश में यूनेस्को का ऐसा सत्र आयोजित हुआ। उस दौरान भारत के सबसे बड़े त्योहार को यह सम्मान मिला, जिसने पन्नो पर इतिहास रच दिया है। वहीं, बैठक में मौजूद भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इसे सांस्कृतिक जीत बताया।

PM मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए एक्स पर एक पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने लिखा कि दिवाली भारतीय सभ्यता की आत्मा है और यह ज्ञान व धर्म का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सूची में शामिल होने के बाद दुनिया में दिवाली की पहचान और मजबूत होगी। पीएम मोदी ने आगे यह भी कहा कि भगवान राम के आदर्श हमेशा की तरह समाज को सही दिशा देते रहेंगे।

ICH सूची में शामिल

बैठक में दिवाली का नाम ICH सूची में शामिल किया गया, जिसकी खबर मिलते ही लाल किले के प्रांगण में माहौल बदला-बदला नजर आया। प्रतिनिधियों और मेहमानों के बीच वंदे मातरम् और भारत माता की जय के नारे गूंजने लगे। भारतीय संस्कृति से जुड़े कलाकारों और विशेषज्ञों ने इसे पारंपरिक त्योहार की वैश्विक जीत कहा। बता दें कि दिवाली को मिलाकर अब भारत की 15 परंपराएं यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में दर्ज हो चुकी हैं। इनमें योग, रामलीला, बंगाल की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा, कुंभ मेला, वैदिक मंत्रों का उच्चारण और रामायण की पारंपरिक प्रस्तुति शामिल हैं।

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