Hinglaj Mata Shaktipeeth : हिंदू धर्मग्रंथ Devi Purana के अनुसार, जब राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया, तो माता सती ने यज्ञ कुंड में स्वयं को समर्पित कर दिया। इस घटना से क्रोधित होकर भगवान शिव सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे। तब भगवान Vishnu ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए, जो अलग-अलग स्थानों पर गिरे और वहीं शक्तिपीठ स्थापित हो गए।
इन्हीं 51 शक्तिपीठों में एक प्रमुख है Hinglaj Mata Temple, जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के लसबेला जिले में स्थित है। इस मंदिर को हिंगलाज भवानी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती का ब्रह्मरंध्र यानी सिर का हिस्सा गिरा था, जिससे यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।
Hinglaj Mata Shaktipeeth
यह शक्तिपीठ करीब 2000 साल पुराना माना जाता है और पहाड़ियों के बीच एक गुफा में स्थित है। इसका रास्ता कठिन जरूर है, लेकिन इसकी प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। मान्यता है कि भगवान राम ने भी इस स्थान के दर्शन किए थे, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है। इस शक्तिपीठ में माता को कोटरी (भैरवी) के रूप में पूजा जाता है, जबकि भैरव को भीमलोचन कहा जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। इस स्थान का उल्लेख दुर्गा चालीसा में भी मिलता है, जिससे इसकी महिमा और बढ़ जाती है।
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
हिंगलाज माता शक्तिपीठ सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी खास है। यहां स्थानीय मुस्लिम समुदाय भी श्रद्धा रखता है और इसे “नानी का हज” या “बीबी नानी पीर” के नाम से पुकारता है। यह स्थान हिंदू-मुस्लिम एकता का अनोखा उदाहरण पेश करता है। हर साल अप्रैल महीने में कराची से हिंगलाज माता की यात्रा शुरू होती है। इस दौरान यहां भव्य मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। नवरात्र के समय भी यहां विशेष पूजा और उत्सव का आयोजन किया जाता है, जिससे यह जगह आस्था का बड़ा केंद्र बन जाती है।
(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Headlines India News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)
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