Health Tips : कई लोग दिनभर की थकान के बाद जैसे ही बिस्तर पर लेटते हैं, पैरों में अजीब-सी झनझनाहट, खिंचाव या रेंगने जैसा एहसास शुरू हो जाता है। कुछ देर टहल लें तो राहत मिलती है, लेकिन जैसे ही दोबारा लेटें, वही परेशानी लौट आती है। अक्सर इसे लोग थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम’ (RLS) का संकेत हो सकता है।
गुड़गांव स्थित न्यूरोमेट वेलनेस केयर के न्यूरोलॉजी डायरेक्टर डॉ. भूपेश कुमार मनसुखानी बताते हैं कि यह समस्या मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र से जुड़ी होती है। हमारे दिमाग में डोपामिन नाम का रसायन मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
Health Tips: न समझें मामूली थकान
जब इसका संतुलन बिगड़ता है, तो पैरों में अनियंत्रित हरकत और बेचैनी महसूस होती है। खासतौर पर आराम की स्थिति या रात के समय यह लक्षण ज्यादा उभरते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम कई बार शरीर की दूसरी समस्याओं का संकेत भी देता है। उदाहरण के लिए पार्किंसंस डिजीज में भी डोपामिन की कमी देखी जाती है। इसके अलावा कुछ अन्य स्थितियां भी इस परेशानी को बढ़ा सकती हैं:
- शरीर में आयरन की कमी
- पेरिफेरल न्यूरोपैथी
- रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या
- किडनी से संबंधित दीर्घकालिक रोग
इन कारणों की समय रहते जांच जरूरी होती है, ताकि सही इलाज शुरू किया जा सके।
दिनभर रहता है असर
इस सिंड्रोम का सबसे बड़ा नुकसान नींद पर पड़ता है। बार-बार पैरों में हलचल के कारण व्यक्ति गहरी नींद नहीं ले पाता। नतीजा यह होता है कि अगला दिन थकान, सुस्ती और चिड़चिड़ेपन में गुजरता है। कई लोगों को काम पर ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है। लंबे समय तक अनदेखी करने पर यह मानसिक और शारीरिक सेहत दोनों पर असर डाल सकता है।
कब समझें कि डॉक्टर से मिलना जरूरी है?
अगर पैरों की यह बेचैनी हफ्तों या महीनों से लगातार बनी हुई है, रात की नींद खराब कर रही है या परिवार में पहले किसी को न्यूरोलॉजिकल बीमारी रही है, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। सही समय पर जांच से स्थिति को नियंत्रित करना आसान हो जाता है।
अपनाएं ये जरूरी कदम
समस्या की पहचान होने के बाद इलाज संभव है। डॉक्टर की सलाह से दवाएं दी जाती हैं, जो डोपामिन संतुलन सुधारने में मदद करती हैं। इसके अलावा कुछ आदतों में बदलाव भी असरदार साबित होते हैं:
- शरीर में आयरन लेवल की जांच और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट
- नियमित हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग
- सोने और जागने का तय समय
- कैफीन और धूम्रपान से दूरी
- रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम कोई साधारण थकान नहीं है। शरीर के संकेतों को समझना और समय पर इलाज कराना ही बेहतर नींद और स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
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