HAL-UAC : भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने एक ऐतिहासिक साझेदारी पर मुहर लगाई है। इस समझौते के तहत रूस के लोकप्रिय सुपरजेट-100 (SJ-100) विमान का उत्पादन भारत में किया जाएगा। यह कदम भारत को विमान निर्माण के वैश्विक नक्शे पर और मजबूत स्थिति में ले जाने वाला माना जा रहा है। इस साझेदारी को ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई रफ्तार देने वाला बताया जा रहा है।
हैदराबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ‘विंग्स इंडिया’ एविएशन प्रदर्शनी के दौरान इस करार पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब भारत घरेलू विमानन उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है।
HAL-UAC की डील
समझौते के तहत HAL भारत में दो इंजन वाले नैरो-बॉडी जेट विमानों का लाइसेंस आधारित निर्माण करेगी। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना और विदेशी विमानों पर निर्भरता कम करना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह डील घरेलू विमान निर्माण क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा देगी।
HAL का लक्ष्य
HAL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डीके सुनील ने जानकारी दी कि कंपनी अगले तीन वर्षों में अपनी मौजूदा फैक्ट्रियों में सेमी नॉक-डाउन SJ-100 विमानों का निर्माण शुरू करना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगले एक से डेढ़ साल में लगभग 10 विमानों को भारत लाने की योजना है, ताकि परिचालन की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके। बता दें गि कंपनी रूस से 10 से 20 विमानों को लीज पर लेने की संभावनाओं पर विचार कर रही है, ताकि घरेलू उड़ानों के लिए इन्हें तुरंत उपयोग में लाया जा सके। इससे क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत के लिए 200 विमानों का संभावित बाजार
HAL प्रबंधन के अनुसार, भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते विमानन बाजार में 200 से अधिक SJ-100 विमानों की संभावनाएं मौजूद हैं। बढ़ती घरेलू उड़ानें, टियर-2 और टियर-3 शहरों की कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय एयरलाइंस की मांग इस विमान के लिए मजबूत बाजार तैयार कर सकती हैं। अब बात करें तो हैं सुपरजेट-100 के बारे में जो कि एक आधुनिक और उच्च तकनीक वाला वाणिज्यिक विमान है, जिसमें आमतौर पर 87 से 108 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है। यह विमान ईंधन दक्षता, कम ऑपरेटिंग लागत और आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम के लिए जाना जाता है। वर्तमान में यह कई रूसी एयरलाइनों और सरकारी ऑपरेटरों द्वारा उपयोग में लिया जा रहा है।
एविएशन भविष्य
विशेषज्ञों का मानना है कि HAL और UAC की यह साझेदारी भारत को नागरिक विमान निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह न केवल तकनीकी क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक विमानन उद्योग में एक नए मुकाम तक भी पहुंचा सकती है।





