बिहार में अनुदान घोटाला : फर्जी मुर्दे दिखाकर थी अनुग्रह राशि हड़पने की तैयारी, खुलासे के बाद मचा हड़कंप

कोरोनावायरस के संक्रमण से मरने वालों के आश्रितों को राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे 4 लाख की अनुग्रह राशि में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मुजफ्फरपुर में घपलेबाजों द्वारा जिंदा लोगों का डेथ सर्टिफिकेट बनवा कर उनके नाम पर अनुदान का आवंटन मंगवा लिया गया है। भुगतान से पहले भौतिक सत्यापन में इसका खुलासा हुआ है। मामला उजागर होने के बाद आपदा प्रबंधन कार्यालय से लेकर जिला स्वास्थ समिति और एसकेएमसीएच में हड़कंप मच गया है।

कोरोना से मौत में फर्जीवाड़े के ये मामले एसकेएमसीएच से जुड़े हैं। इस फर्जीवाड़े में कोरोना संक्रमण के बाद स्वास्थ्य हो चुके पीड़ितों का अस्पताल से बीएचटी प्राप्त कर लिया गया और उनका डेथ सर्टिफिकेट बनवा लिया गया। जिला स्तरीय कमेटी ने इसके आधार पर अनुदान की सिफारिश कर दी और उनके नाम से जिले को आवंटन भी मिल गया। राशि भुगतान से पहले आपदा प्रबंधन कार्यालय ने सीओ के माध्यम से जब इसका भौतिक सत्यापन कराया तो पता चला कि फाइलों में मर चुके ये लोग जिंदा है। जिले में कोरोना से 805 मृतकों के आश्रितों के लिए अनुदान के अनुशंसा की गई है जिसमें 563 के लिए राशि का आवंटन प्राप्त हो चुका है।

वाल्मीकि कॉलोनी झिटकहियां के अवकाश प्राप्त बैंकर महेंद्र प्रसाद की पत्नी मंजू देवी कोरोना से बीमार हुई थी। एसकेएमसीएच में उनका आरटीपीसीआर टेस्ट कराया गया। दो बार जांच में पॉजिटिव और तीसरी बार नेगेटिव आई। वहां इनसे आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लिए गए थे। लेकिन इन्हें एडमिट नहीं किया गया था। फिर भी इनका नाम मृतकों की सूची में आ गया। मुख्यालय से इनके नाम पर चार लाख की राशि का आवंटन हो गया। सत्यापन के लिए सीओ जब इनके घर पहुंचे तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

एक अन्य मामला मुशहरी का है। मुशहरी निवासी मनोज कुमार कोविड-19 पॉजिटिव होने के बाद एसकेएमसीएच में भर्ती हुए और इलाज से स्वस्थ होकर घर चले गए। घपलेबाजों ने उनका भी डेथ सैटिफिकेट बना लिया और मुख्यालय से  4 लाख का अनुदान मंगवा लिया गया। सीओ के सत्यापन में मनोज कुमार  जीवित मिले। उसके बाद उनका भुगतान रोक दिया गया।

इस मामले में आपदा प्रबंधन के अपर समाहर्ता डॉ अजय कुमार ने कहा है कि मुख्यालय से राशि आने के बाद जिला स्तरीय समिति ने भुगतान के लिए जो सूची भेजी है उनके सत्यापन के दौरान 2 लोग जीवित पाए गए हैं। यह जांच का विषय है कि इनका डेथ सर्टिफिकेट कैसे बना। पता लगाया जा रहा है कि ऐसे और कितने मामले हैं। जांच में आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी।

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