पूर्व DGP ‘गुप्तेश्वर’ पांडेय ने बताया क्यों बने कथावाचक, राजनीति में फेल कर गया, इसके लिए ऊंची योग्यता चाहिए जो मुझमें नहीं है

पूर्व डीजीपी, नेता और अब कथावाचक के अवतार में दिख रहे गुप्तेश्वर पांडेय को अब भगवान के अलावे किसी चीज में रूची नहीं रह गई है। नेता बनने के लिए डीजीपी की नौकरी छोड़ने वाले गुप्तेश्वर पांडेय जब अपने लक्ष्य से चूके तो कह रहे कि अब उन्हें सांसारिक बातों में रूचि नहीं। पूर्व डीजीपी ने अपनी हार स्वीकारते हुए कहा कि मैं राजनीति में फेल हो गया। खाकी को समय से पहले त्याग कर खादी और अब गेरूआ वष्त्र धारण करने की तस्वीर सामने आने के बाद पूर्व डीजीपी की खूब किरकिरी हो रही है। पटना में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि राजनीति में फेल हो गये। गुप्तेश्वर पांडेय ने आगे कहा कि राजनेता बनने की योग्यता उनमें नहीं है। इसके लिए उंची योग्यता और कई तरह का गुण चाहिए जो हमने नहीं है।

पूर्व डीजीपी पांडेय ने कहा कि मैं राजनीति में फेल हो गया। उन्हें एक मौका मिला था लेकिन हम फेल साबित हुए। आगे कहा कि राजनीति करना इतना आसान काम नहीं है। राजनीति करने के लिए जो योग्यता चाहिए वह मुझमें नहीं है। हर आदमी चाहता है वो विधायक और मंत्री बने लेकिन नेता बनने के लिए बहुत गुण और ऊंची योग्यता चाहिए। गुप्तेश्वर पांडेय ने स्वीकार किया कि मुझमें वो  योग्यता नही,मैं उस लायक नही हूं।

बता दें, गुप्तेश्वर पांडेय 6 महीने पहले ही डीजीपी की नौकरी छोड़ दी थी और वीआरएस ले लिया था। नौकरी छोड़ने के बाद वे जेडीयू में शामिल हो गए थे। खुद सीएम नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी ज्वाइन कराया था।  वे बक्सर सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। वे जोरशोर से चुनावी तैयारी में लगे थे लेकिन ऐन वक्त पर वो राजनीतिक गच्चा खा गये।बिहार के पूर्व डीजीपी विस चुनाव का टिकट लेने में फेल हो गये। इस तरह से सारी तैयारी धरी की धरी रह गई. गुप्तेश्वर पांडेय न घर के रहे न घाट के।

उन्होंने बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुझे कोई धोखा नही दिया है। उन्होंने कहा कि कोई सिर्फ विधायक के टिकट के लिए डीजीपी की नौकरी नही छोड़ता. मेरा भरोसा सिर्फ ईश्वर पर है .राजनीति में आने का सपना देखना गलत था. गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि अब मुझे भगवान के अलावे किसी किसी दूसरी चीज में रूची नहीं। मैं बहुत पहले से कथावाचन करते रहा हूं। यह कोई आज का नहीं बल्कि काफी समय से भगवत गीता का पाठ करते आ रहा हूं। किसी ने सोशल मीडिया मीडिया में तस्वीर डाल दी तो अब लोग जाने हैं कि मैं कथावाचक भी हूं। गुप्तेश्वर पांडेय ने आगे कहा कि कथा वाचन के लिए मुझे देश-विदेश से बुलावा आया रहा है। कई देश के लोगों ने संपर्क साधा है।हम कथा वाचन सिर्फ चित्त शुद्धि के लिए करते हैं.

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