Finland of India : भारत में प्राकृतिक सुंदरता की बात हो और केरल का नाम न आए… ऐसा संभव नहीं है। अब केरल सिर्फ हरियाली, समुद्र और बैकवाटर्स तक सीमित नहीं रहा। हाल के वर्षों में केरल को ‘फिनलैंड ऑफ इंडिया’ एक नई पहचान मिली है। केरल की सबसे बड़ी ताकत उसकी शिक्षा व्यवस्था है। 94 प्रतिशत से अधिक साक्षरता दर ने इस राज्य को देश में सबसे आगे खड़ा कर दिया है। गांव से लेकर शहर तक स्कूलों की पहुंच, ड्रॉपआउट रेट का कम होना और शिक्षा में समान अवसर केरल की पहचान बन चुके हैं। यही वजह है कि जब दुनिया फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली की तारीफ करती है, तो भारत में केरल की तुलना उससे की जाने लगती है।
केरल में सामाजिक न्याय और समानता केवल कागजों तक सीमित नहीं है। यहां महिलाओं की आबादी पुरुषों से अधिक है, जो अपने आप में एक बड़ा सामाजिक संकेत है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में महिलाओं की भागीदारी ने केरल को देश के अन्य हिस्सों से अलग पहचान दी है।
Finland of India केरल
बता दें कि यह स्थिति काफी हद तक फिनलैंड जैसे नॉर्डिक देशों से मेल खाती है, जहां लैंगिक समानता सामाजिक व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। केरल का मानव विकास सूचकांक देश में सबसे ऊंचे स्तर पर है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, लंबी औसत आयु और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं यहां के लोगों के जीवन को सुरक्षित बनाती हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूत पकड़ और सस्ती चिकित्सा सुविधाएं केरल को उस रास्ते पर ले जाती हैं, जिस पर फिनलैंड जैसे विकसित देश पहले से मौजूद हैं।
जल-संपदा से भरा भूगोल
फिनलैंड को दुनिया “हजार झीलों की भूमि” के नाम से जानती है। केरल का भूगोल भी कुछ ऐसा ही संदेश देता है। राज्य में अनगिनत झीलें, नदियां, लैगून और प्रसिद्ध बैकवाटर्स हैं। उष्णकटिबंधीय मौसम होने के बावजूद जल-संपदा के मामले में केरल की समृद्धि उसे फिनलैंड की याद दिलाती है। यही वजह है कि प्रकृति प्रेमी दोनों जगहों को खास मानते हैं। केरल और फिनलैंड के बीच यह तुलना सिर्फ शब्दों की नहीं है। बीते कुछ वर्षों में दोनों के बीच शिक्षा और टिकाऊ विकास को लेकर सहयोग भी बढ़ा है। शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम विकास और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों में फिनलैंड के अनुभवों से केरल ने काफी कुछ सीखा है। इस साझेदारी ने ‘फिनलैंड ऑफ इंडिया’ की छवि को और मजबूत किया है।
संस्कृति और परंपरा की अलग पहचान
केरल को ‘गॉड्स ओन कंट्री’ कहा जाता है और इसकी वजह सिर्फ प्रकृति नहीं, बल्कि इसकी सांस्कृतिक विरासत भी है। आयुर्वेद, कथकली, मोहिनीअट्टम, मसालों की खेती और शांत जीवनशैली इसे खास बनाती है। भले ही केरल और फिनलैंड की संस्कृति अलग हो, लेकिन दोनों जगह इंसान-केंद्रित विकास की सोच साफ नजर आती है।
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