हर महिला को स्तनपान उपयुक्त माहौल उपलब्ध कराने हेतु निवेश किए गए प्रत्येक डॉलर के बदले में 35 डॉलर के सृजन का अनुमान: नफीसा बिंते शफीक

पटना, 22 जून: “नवजात शिशु की पोषण संबंधी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ उसके मस्तिष्क और संज्ञानात्मक क्षमता के विकास में स्तनपान की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह माताओं के लिए भी लाभकारी है और उन्हें ओवेरियन एवं स्तन कैंसर से बचाने में मदद करता है। हाल के दिनों में हुए कुछ अध्ययनों के मुताबिक स्तनपान के ज़रिए मां से बच्चे में एंटीबॉडी संचारित हो सकते हैं, जिससे बच्चे को कोविड-19 से महत्वपूर्ण सुरक्षा मिल सकती है। एक अध्ययन से यह भी पता चलता है कि एक महिला को स्तनपान कराने के लिए निवेश किए गए प्रत्येक डॉलर के बदले में 35 डॉलर का सृजन होता है, ” यूनिसेफ बिहार की राज्य प्रमुख नफीसा बिन्ते शफीक ने कहा।


यूनिसेफ बिहार के सहयोग से नेशनल नियोनेटल फोरम (एनएनएफ), बिहार चैप्टर के सदस्यों के लिए “कोविड पॉजिटिव माताओं में स्तनपान” विषय पर एक संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. स्तनपान की प्रारंभिक शुरुआत और एक्सक्लूसिव स्तनपान प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए अध्ययन और साक्ष्य आधारित अनुभव और सीखों को साझा करना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था। बैठक की अध्यक्षता एनएनएफ, बिहार चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. (प्रो.) के.एन. मिश्रा ने की। महाराष्ट्र सरकार और यूनिसेफ की वरिष्ठ सलाहकार एवं महाराष्ट यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेस की पूर्व वीसी, डॉ. मृदुला फड़के समेत डॉ लोकेश तिवारी, विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग, एम्स पटना, डॉ. (प्रो.) ए. के. जायसवाल, विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग, पीएमसीएच, डॉ. राकेश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, बाल रोग विभाग, एनएमसीएच, पटना, डॉ. राकेश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, बाल रोग विभाग, एनएमसीएच, पटना, डॉ ए. के. तिवारी, एसोसिएट प्रोफेसर, बाल रोग विभाग, एनएमसीएच, डॉ वी.पी. राय, राज्य कार्यक्रम अधिकारी, बाल स्वास्थ्य, एसएचएस-बिहार जैसे प्रसिद्ध विशेषज्ञ बैठक में मौजूद रहे।

“बीएमजे पीडियाट्रिक्स ओपन” में प्रकाशित एम्स पटना के एक अध्ययन से पता चलता है कि अगर कोविड -19 संक्रमित मां अपने बच्चे को कोविड सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ स्तनपान कराती है तो बच्चे में संक्रमण की कोई संभावना नहीं होती है। डब्ल्यूएचओ, सीडीसी (रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र) और एनएनएफ नीति के अनुरूप एक्सप्रेस्ड ब्रेस्ट मिल्क (ईबीएम) के माध्यम से किसी भी संक्रमण का कोई सबूत नहीं मिला है।

अध्ययनकर्ता डॉ. लोकेश तिवारी और डॉ. अरुण प्रसाद ने बताया कि अध्ययन के लिए 50 कोविड पॉजिटिव गर्भवती माताओं को नामांकित किया गया था। प्रसव के चार दिनों के भीतर प्रत्येक मां से ईबीएम का एक नमूना एकत्र किया गया था। रीयल टाइम आरटी-पीसीआर जांच में किसी भी ईबीएम नमूना को कोविड-19 पॉजिटिव नहीं पाया गया। मां के दूध के सभी नमूने कोविड परीक्षण में निगेटिव पाए गए। प्रसव से पहले संक्रमित पाई गई जिन माताओं ने अपने नवजात शिशुओं को स्तनपान कराया उनमें से अधिकतम में कोविड-19 का किसी प्रकार का का लक्षण नहीं पाया गया।
डॉ. मृदुला फड़के ने कहा कि स्तन के दूध में कोविड वायरस के संचरण का कोई प्रमाण नहीं है। इसलिए, डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ और अन्य अध्ययनों के अनुसार शिशुओं को स्तनपान कराना सुरक्षित है। स्तनपान प्रोटोकॉल का पालन करने के अलावा पोषण पुनर्वास केंद्र और तीव्र कुपोषण के प्रबंधन हेतु सामुदायिक कार्यक्रम पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। इसी तरह, मां के पोषण को सबसे अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए। स्तनपान कराने वाली मां के लिए कोविड वैक्सीन लेना सुरक्षित है। गर्भवती महिलाओं को भी प्रसूति रोग विशेषज्ञ के परामर्श से टीका लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।


मां के दूध के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. (प्रो.) केएन मिश्रा ने कहा कि यदि जन्म के एक घंटे के भीतर मां का दूध दिया जाए तो यह नवजात शिशु पर चमत्कारी प्रभाव पैदा करता है। शिशु की सभी आवश्यक पोषण आवश्यकताओं को पूरा करते हुए उसकी प्रतिरोधक क्षमता को भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ाकर विभिन्न संक्रमणों से बचाता है। वर्तमान कोविड-19 महामारी के संदर्भ में माँ के दूध की किसी भी कमी को रोकना और भी महत्वपूर्ण हो गया है, अन्यथा बच्चे का स्वास्थ्य और जीवन ख़तरे में पड़ सकता है।


डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि बच्चे को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए स्तनपान कराना चाहिए। बच्चे को कोविड-19 संक्रमित मां के साथ अलग बिस्तर में रखना चाहिए। अगर माँ मास्क पहनती है और बार-बार हाथ धोती है तो त्वचा से त्वचा के संपर्क से कोई नुकसान नहीं है। फॉर्मूला फीड से बचना चाहिए। डिस्चार्ज के बाद किसी भी संक्रमण की संभावना को कम करने के लिए बच्चे के साथ कई लोगों के संपर्क से बचना चाहिए।

डॉ. वी.पी. राय, राज्य कार्यक्रम अधिकारी, बाल स्वास्थ्य, राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी ने बताया कि निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में काम करने वाले सभी पेशेवरों को कोविड-19 के दौरान स्तनपान के लिए कर्मचारियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के उन्मुखीकरण पर जोर देना चाहिए। उन्होंने सभी बाल रोग विशेषज्ञों से अनुरोध किया कि वे देखभाल करने वालों को प्रेरित करें और कोविड -19 के दौरान गर्भवती, स्तनपान कराने वाली माताओं और परिवार को स्तनपान पर जरूरी सलाह दें।


यूनिसेफ बिहार की पोषण अधिकारी डॉ. शिवानी डार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बिहार में जन्म के एक घंटे के भीतर सिर्फ 31% बच्चों को मां का दूध मिल पाता है। हालांकि, एक्सक्लूसिव स्तनपान में सुधार हुआ है, फिर भी यह 60 प्रतिशत से कम है। इसीप्रकार, बच्चे के जन्म से 2 साल तक बोतल से दूध पिलाने की प्रथा में 9.5% से 20% तक भिन्नता दर्ज़ की गई है। स्तनपान को लेकर कई मिथक और भ्रांतियां समाज में हैं। इसलिए, स्वास्थ्य प्रदाताओं, विशेष रूप से बच्चे के जन्म और बाल स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में परिवार की ज़िम्मेदारी सबसे ज़्यादा है ताकि बच्चे को मां का दूध पिलाने के लिए प्रेरित करने के अलावा माताओं को उपयुक्त माहौल दिया जा सके।


विशेषज्ञों ने यह भी सिफारिश की कि प्रसव समेत कोरोना पॉजिटिव मां द्वारा नवजात को जल्दी स्तनपान कराने संबंधी प्रोटोकॉल में कोई बदलाव नहीं किया गया है। डॉ. ए.के. तिवारी ने बताया कि प्रैक्टिकल नियोनेटोलॉजी पर एक त्रैमासिक चिकित्सा पत्रिका निकाली गई है।

कार्यक्रम के दौरान यूनिसेफ बिहार के पोषण विशेषज्ञ रबी पाढ़ी और पोषण अधिकारी डॉ. संदीप घोष भी उपस्थित थे। एनएनएफ बिहार के सचिव डॉ. अनिल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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