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Eating Disorder से जूझ रहे मरीजों के लिए इंटरनेट मीडिया बन सकता है बड़ा खतरा, शोध में चेतावनी

Eating Disorder
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Eating Disorder : हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि ईटिंग डिसऑर्डर जैसी गंभीर समस्या से उबरने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए इंटरनेट मीडिया मदद की जगह खतरे का कारण बन सकता है। अक्सर मरीज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सहारा और प्रेरणा खोजते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

सोशल मीडिया पर आहार, पोषण और वजन घटाने से जुड़ी भ्रामक और गलत जानकारी तेजी से फैलती रहती है। जब ईटिंग डिसऑर्डर से ग्रस्त व्यक्ति इस सामग्री को देखता है, तो उसका मन भ्रमित होता है।

Eating Disorder बन सकता है बड़ा खतरा

इसके अलावा, दूसरों की “परफेक्ट” और चमक-दमक वाली जिंदगी देखकर उनकी आत्म-सम्मान कम होता है और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्थितियां उभर सकती हैं। परिणामस्वरूप उनकी खान-पान की आदतें सुधरने की बजाय और बिगड़ने लगती हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि मरीज सोशल मीडिया पर ऐसे अकाउंट्स फॉलो करते हैं जो स्वास्थ्य और रिकवरी से जुड़े सकारात्मक संदेश देते हैं। वे नकारात्मक सामग्री को ब्लॉक भी करते हैं, लेकिन प्लेटफॉर्म का रिकमेंडेशन सिस्टम उन्हें फिर से उसी जाल में खींच लेता है, जिससे वे बच रहे होते हैं। लगातार वजन घटाने और फिटनेस से जुड़ा कंटेंट दिखाई देने से मरीजों की स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

रिकवरी में बाधा

शोध में शामिल प्रतिभागियों ने बताया कि बार-बार इस तरह के कंटेंट से संपर्क में आने पर उनका ठीक होने का प्रक्रिया रुकावट भरा हो जाता है। उनके दिमाग में अस्वस्थ सोच फिर से मजबूत होती है और पुराने गलत खान-पान के पैटर्न लौट आते हैं। यह संकेत देता है कि रिकवरी के दौरान सोशल मीडिया गंभीर चुनौती पेश कर सकता है।

स्पष्ट चेतावनी

विशेषज्ञों ने कहा कि इंटरनेट मीडिया सीधे ईटिंग डिसऑर्डर का कारण नहीं है और न ही किसी पोस्ट को देखने भर से बीमारी तुरंत वापस आती है। लेकिन रिकवरी के दौरान यह मरीजों के लिए मानसिक रूप से बाधक बन सकता है। शोध यह स्पष्ट करता है कि सोशल मीडिया से दूरी बनाना और नियंत्रित उपयोग करना ईटिंग डिसऑर्डर से उबर रहे लोगों के लिए अहम कदम हो सकता है।

इस अध्ययन से यह भी संकेत मिलता है कि मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का अंधाधुंध उपयोग नहीं करना चाहिए। मरीजों और उनके परिवारों को सावधानी बरतनी होगी और केवल प्रमाणिक और नियंत्रित जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।

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