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Earthquake: हिंद महासागर में 4.2 तीव्रता का आया भूकंप, नुकसान या सुनामी की चेतावनी नहीं!

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Earthquake : रविवार तड़के हिंद महासागर में 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। National Center for Seismology (NCS) के मुताबिक यह भूकंप सुबह 5:39 बजे आया और इसकी गहराई समुद्र तल से करीब 90 किलोमीटर थी। राहत की बात यह है कि इस भूकंप से किसी तरह के नुकसान या जनहानि की खबर सामने नहीं आई है। वैज्ञानिकों ने इस भूकंप को हल्का बताया है। इसके चलते किसी भी तरह की सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की गई। हालांकि, यह इलाका भौगोलिक रूप से काफी सक्रिय माना जाता है, जहां समुद्र के नीचे हलचल होती रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति सामान्य है और घबराने की जरूरत नहीं है।

भूकंप धरती की सतह से लेकर करीब 700 किलोमीटर नीचे तक कहीं भी आ सकते हैं। बता दें कि हालिया भूकंप 90 किलोमीटर की गहराई पर आया, इसलिए इसे मध्यवर्ती श्रेणी में रखा जा सकता है।

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United States Geological Survey (USGS) के अनुसार, भूकंप को गहराई के आधार पर तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें उथला (0-70 किमी), मध्यवर्ती (70-300 किमी) और गहरा (300-700 किमी) शामिल है। 70 किलोमीटर से ज्यादा गहराई वाले भूकंप को आम तौर पर डीप फोकस भूकंप कहा जाता है। भूकंप का मुख्य कारण धरती के अंदर मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल होती है। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, खिसकती हैं या दबाव बनाती हैं, तो ऊर्जा बाहर निकलती है और जमीन हिलने लगती है। समुद्र के नीचे होने वाले भूकंप अक्सर प्लेटों के खिसकने से होते हैं, जो कभी-कभी सुनामी का कारण भी बन सकते हैं। यही वजह है कि समुद्री क्षेत्रों को ज्यादा संवेदनशील माना जाता है।

किन जगहों पर ज्यादा आते हैं भूकंप

दुनिया में कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां भूकंप ज्यादा आते हैं। जैसे प्रशांत महासागर का ‘रिंग ऑफ फायर’ इलाका, हिमालयी क्षेत्र और हिंद महासागर के आसपास के इलाके। भारत में भी उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर-पूर्वी राज्य और अंडमान-निकोबार क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं।

2004 की सुनामी ने मचाई थी तबाही

हिंद महासागर में पहले भी बड़ा भूकंप आ चुका है। 26 दिसंबर 2004 को 2004 Indian Ocean earthquake and tsunami ने भारी तबाही मचाई थी। यह भूकंप 9.2 से 9.3 तीव्रता का था, जिसका केंद्र इंडोनेशिया के पास समुद्र में था। इसके बाद आई सुनामी की लहरें 30 मीटर तक ऊंची थीं, जिसने भारत, श्रीलंका, थाईलैंड समेत 14 देशों में करीब 2.27 लाख लोगों की जान ले ली थी।

भूकंप से बचाव के उपाय

भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इससे बचाव जरूर किया जा सकता है। झटके महसूस होते ही खुले स्थान पर चले जाएं और इमारतों, बिजली के खंभों से दूर रहें। अगर घर के अंदर हों तो मजबूत टेबल या फर्नीचर के नीचे छिप जाएं। लिफ्ट का इस्तेमाल न करें और अफवाहों से बचें। इसके अलावा, भूकंप संभावित क्षेत्रों में मजबूत निर्माण और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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