कोरोना काल में जनता को छोड़ घरों में दुबके रहे सांसद और मंत्री, अब बाढ़ आई तो दिल्ली-पटना चले गए

बाढ़ ने बिहार के 10 जिलों के 59 प्रखंड़ों में कहर बरपाया है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, अब तक इससे 25 लोगों की मौत हो चुकी है। 77.77 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और 69 जानवर बाढ़ के पानी में बह चुके हैं। बाढ़ की त्रासदी की तस्वीरें दिलों को झकझोर दे रही हैं, लेकिन इन सबके बीच वो नेताजी कहां हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करने की जिम्मेवारी उठाई है। बिहार में बाढ़ है और सांसद बाहर हैं। ये हाल बिहार के उन सांसदों का है जिनके इलाके में बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा है। सबसे पहले बात करते हैं समस्तीपुर की। इस लोकसभा के तीन विधानसभा क्षेत्र हायाघाट, कल्याणपुर और कुशेश्वरस्थान बाढ़ से प्रभावित है। 3 से 4 लाख की आबादी बाढ़ की दहशत में रात काट रही है, लेकिन यहां के सांसद लोजपा के प्रिंसराज दिल्ली में हैं। प्रिंसराज कह रहे हैं पिछले दिनों क्षेत्र गया था दिवंगत विधायक शशिभूषण हजारी जी की अंतेष्ठी में, तब मैंने कुशेश्वरस्थान का हाल भी लिया था। बाकी क्षेत्रों का क्या? इस पर प्रिंस कुछ ज्यादा नहीं बोल पाते।

शिवहर की सांसद भाजपा की रमा देवी हैं। रमा देवी दिल्ली में हैं तो उनका सरकारी संपर्क नंबर शिवहर में। सारण के सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी भी संपर्क से बाहर हैं। उनके सरकारी नंबर पर कोई फोन रिसीव नहीं हो रहा। सारण जिले के तीन प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हैं। मधुबनी के सांसद अशोक कुमार यादव भी दिल्ली में हैं। लोकसभा की पार्लियामेंट्री कमेटी की बैठक में शामिल होने के लिए 9 जुलाई से ही वो दिल्ली में हैं और 17 जुलाई तक वहीं रहेंगे। अशोक कुमार कहते हैं कि बाढ़ से मेरे लोकसभा क्षेत्र के सभी विधानसभा क्षेत्र बेहाल हैं। लाखों की आबादी प्रभावित हैं। 100 फीसदी फसल बर्बाद हो गए हैं, लेकिन इस पूरी तबाही के बीच भी वो अपने लोकसभा क्षेत्र में नहीं बल्कि दिल्ली में है। ये पूछने पर कि वो अपने क्षेत्र के लोगों को कैसे राहत दिलवा रहे हैं, इस पर अजय यादव थोड़े नाराज हो जाते हैं और कहते हैं कि जहां बात रखनी है वहां रख रहा हूं।

पश्चिमी चंपारण के सांसद संजय जायसवाल हैं, जो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। दिल्ली से चंडीगढ़ के सरकारी दौरे पर गए संजय जायसवाल के मुताबिक बीते तीन दिनों से वो बिहार से बाहर हैं। उनका दावा है कि बिहार से निकलने के पहले उन्होंने क्षेत्र के लोगों की पूरी मदद की है। मुजफ्फरपुर के 10 प्रखंडों में बाढ़ है, लेकिन यहां के सांसद अजय निषाद संपर्क से बाहर हैं। गोपालगंज के सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन, सीतामढ़ी के सांसद सुनील कुमार पिंटू, दरभंगा के सांसद गोपालजी ठाकुर और पूर्वी चंपारण के सांसद राधामोहन सिंह अपने क्षेत्र में हैं। वहीं, गोपालजी ठाकुर और सुनील पिंटू को छोड़ दें तो बाकी दोनों सांसद लगभग 48 घंटे के दौरे पर अपने क्षेत्र पहुंचे हैं। सिर्फ सांसद नहीं, बल्कि बिहार सरकार के कई मंत्री भी बाढ़ प्रभावित इलाकों से आते हैं। इनमें सबसे पहला नाम है राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री रामसूरत राय का। मुजफ्फरपुर से आने वाले मंत्री जी के शहर में बाढ़ का पानी सड़कों पर चढ़ा है। शहर में नावें चल रही हैं, लेकिन मंत्री जी कुछ घंटों पहले ही मुजफ्फपुर पहुंचे हैं। अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा नहीं किया और मीटिंग में व्यस्त हैं। दूसरा नाम है दरभंगा से आनेवाले मदन सहनी का। समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी कभी रूठ कर तो कभी कोरोना से परेशान होकर दरभंगा जाते रहते हैं, लेकिन अब जब बाढ़ आई है तो मंत्री जी पटना में हैं। गोपालगंज से आनेवाले भाजपा के विधायक और बिहार सरकार में सहकारिता मंत्री सुभाष सिंह भी पटना में हैं। सुभाष सिंह का विधानसभा क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है।

बाढ़ के दौरान भले ही बिहार के दिग्गज नेता दिल्ली और पटना में अपनी राजनीति चमका रहे हों, लेकिन कोरोना के दौरान इन्हीं नेताओं ने क्षेत्रों में शरण ली थी। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जब पटना से लेकर दिल्ली तक कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई थीं, तब बिहार के कई बड़े चेहरे क्षेत्रों के प्रवास पर थे। इसमें सबसे बड़ा नाम है आरसीपी सिंह का। केन्द्र में मंत्री बन चुके आरसीपी सिंह पूरे कोरोना काल में अपने गांव नालंदा में रहे। इसी तरह बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी भी अप्रैल और मई के पूरी महीने अपने गांव में ही रहे। मंत्री राम सूरत राय भी अपने मुजफ्फरपुर आवास पर ही रहे। दरभंगा, जाले विधानसभा के विधायक और बिहार सरकार में श्रम संसाधन के साथ ही आईटी विभाग के मंत्री जीवेश कुमार भी पटना में हैं। जीवेश के जाले विधानसभा में बाढ़ है, हालांकि वो ये कह रहे हैं कि 2 से 3 पंचायतों में ही बाढ़ है। मंत्री अब तक इन पंचायतों में भी राहत की खबर लेने नहीं गए।

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