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Donald Trump का नया टैरिफ प्लान, दवा कंपनियों पर सख्ती; मेटल इंपोर्ट नियम भी कड़े

Donald Trump
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Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा आर्थिक कदम उठाते हुए नई टैरिफ नीति का एलान किया है। यह टैरिफ सीधे ईरान पर नहीं, बल्कि उन दवा कंपनियों पर लगाया गया है जो अमेरिका की “मोस्ट फेवर्ड नेशन” प्राइसिंग पहल में शामिल नहीं हैं। नई नीति के तहत, कुछ आयातित पेटेंट दवाओं और उनके जरूरी कंपोनेंट्स पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस फैसले का मकसद कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए मजबूर करना है, ताकि आम लोगों को सस्ती दवाएं मिल सकें।

सरकार का मानना है कि यह कदम अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करेगा। अधिकारियों के मुताबिक, कंपनियों को पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी और अब इस फैसले को लागू किया जा रहा है।

Donald Trump का नया टैरिफ प्लान

इस नीति के जरिए ट्रंप प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि जो कंपनियां अमेरिकी बाजार से फायदा उठा रही हैं, उन्हें देश के भीतर निवेश भी करना होगा। इससे रोजगार के मौके बढ़ने और सप्लाई चेन मजबूत होने की उम्मीद है। नई टैरिफ नीति को लागू करने से पहले कंपनियों को कुछ समय दिया गया है। बड़ी दवा कंपनियों को 120 दिनों और छोटी कंपनियों को 180 दिनों की मोहलत दी गई है। इस दौरान अगर कंपनियां अमेरिकी नियमों के अनुसार खुद को ढाल लेती हैं या यहां उत्पादन शुरू करती हैं, तो उन्हें टैरिफ में राहत मिल सकती है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि जो कंपनियां सहयोग करेंगी, उनके लिए शुल्क में कमी की व्यवस्था रखी गई है।

कुछ देशों को राहत

इस नीति में कुछ खास देशों को राहत भी दी गई है। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड जैसे देशों की कंपनियों को कम टैरिफ देना होगा, जबकि ब्रिटेन की कंपनियों पर और भी कम असर पड़ेगा। इसके अलावा, जो कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्री लगाएंगी या निवेश बढ़ाएंगी, उन्हें टैरिफ में 20 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। बताया जा रहा है कि कई बड़ी कंपनियां पहले ही सरकार से समझौता कर चुकी हैं।

मेटल इंपोर्ट पर भी सख्ती

दवा कंपनियों के साथ-साथ ट्रंप प्रशासन ने मेटल इंपोर्ट को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। स्टील, एल्युमीनियम और तांबे के आयात पर नियमों में बदलाव किया गया है। अब टैरिफ की गणना निर्यात कीमत के बजाय अमेरिकी खरीद कीमत के आधार पर होगी। सरकार का कहना है कि इससे विदेशी कंपनियों द्वारा कीमतों में हेरफेर पर रोक लगेगी और घरेलू उद्योग को फायदा मिलेगा।

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