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महाशिवरात्रि पर करें यह कार्य, भगवान शिव प्रसन्न होकर बदल देंगे किस्मत

Mahashivratri:- महाशिवरात्रि इस साल बहुत ही शुभ योग के साथ आई है। हर साल महाशिवरात्रि का त्यौहार भक्त बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। महाशिवरात्रि का त्यौहार भगवान शिव और मां पार्वती के मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। जिसके बाद से सदियों से यह त्यौहार उनके मिलन की खुशी के रूप में मनाया जाता है।

अगर आप इस दौरान भगवान शिव की पूजा आराधना करते हैं। अगर आप भी भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं और उन्हें प्रसन्न करना चाहते हैं और अपने मन की मुरादे पूरी करना चाहते हैं तो आपको शिवरात्रि के दौरान यह कार्य जरूर करना चाहिए।

कब है महाशिवरात्रि?

महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दौरान अगर आप शिव और शक्ति की तरह ही आपकी भी जोड़ी बनना चाहते हैं और अपनी कुछ मन की इच्छाएं पूरी करना चाहते हैं जीवन में सुख शांति चाहते हैं तो इस दौरान आपको महाशिवरात्रि पर लिंगाष्टकम और शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि इसका पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है और भगवान शिव प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

लिंगाष्टकम स्तोत्र

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।

जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥१॥

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।

रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥२॥

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।

सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥३॥

कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।

शिव पाठ

दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥४॥

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।

सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥५॥

देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।

दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥६॥

अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।

अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥७॥

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।

परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥८॥

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,

भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,

तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥॥

मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,

नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।

मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,

तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥॥

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,

सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।

श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,

तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥॥

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,

मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।

चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय,

तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय,

पिनाकहस्ताय सनातनाय ।

दिव्याय देवाय दिगम्बराय,

तस्मै य काराय नमः शिवाय ॥॥

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥

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