Delhi-NCR : केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में बताया कि Delhi और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के जिलों में भूजल का तेजी से दोहन हो रहा है। खास बात यह है कि इसका सबसे बड़ा हिस्सा घरेलू उपयोग में खर्च हो रहा है, जिससे पानी का संकट बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जल शक्ति राज्य मंत्री Raj Bhushan Choudhary ने बताया कि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में कुल भूजल दोहन का करीब 71.88 प्रतिशत हिस्सा घरेलू जरूरतों के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इसमें बड़ी-बड़ी हाउसिंग सोसाइटियां और अपार्टमेंट भी शामिल हैं।
मंत्री ने कहा कि Central Ground Water Authority (CGWA) केंद्रीय स्तर पर भूजल के उपयोग को नियंत्रित करता है। वहीं, Uttar Pradesh, Haryana और दिल्ली समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अपने-अपने नियम और निगरानी तंत्र भी हैं।
Delhi-NCR में पानी का संकट गहराया
सरकार ने बताया कि विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूजल इस्तेमाल करने से पहले एनओसी लेना जरूरी होता है। उद्योगों और हाउसिंग सोसाइटियों पर तय नियमों के अनुसार शुल्क भी लगाया जाता है। इससे अनियंत्रित दोहन को रोकने की कोशिश की जा रही है। सीजीडब्ल्यूए अवैध रूप से भूजल निकालने वालों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसमें भारी जुर्माना और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क शामिल है। जरूरत पड़ने पर बोरवेल को सील भी किया जा रहा है, ताकि गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
नई बिल्डिंग्स के लिए नियम सख्त
सरकार ने साफ किया कि नए अपार्टमेंट या हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को तभी एनओसी मिलेगी, जब स्थानीय जल आपूर्ति पर्याप्त नहीं होगी। इसके अलावा, सभी ऐसे प्रोजेक्ट्स में डिजिटल वाटर मीटर लगाना जरूरी कर दिया गया है, जिससे पानी के उपयोग पर नजर रखी जा सके। Ministry of Housing and Urban Affairs ने मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में वर्षा जल संचयन को अनिवार्य किया है। 100 वर्ग मीटर या उससे बड़े प्लॉट पर बनने वाली इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग जरूरी है। दिल्ली में इस नियम का पालन भी किया जा रहा है।
देशभर में भूजल स्तर में सुधार
सरकार ने यह भी बताया कि देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर में सुधार के संकेत मिले हैं। 2025 के मानसून के बाद करीब 73.25 प्रतिशत निगरानी वाले कुओं में जल स्तर बढ़ा है। इसके अलावा कुल भूजल पुनर्भरण भी बढ़कर 448.52 अरब घन मीटर तक पहुंच गया है। कुछ इलाकों में सुधार हुआ है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में बढ़ता दोहन चिंता का विषय बना हुआ है। सरकार का कहना है कि सख्त नियमों और जागरूकता के जरिए ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।
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