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भगवान शिव की पूजा के दौरान जपे यह सिद्ध मंत्र, मानसिक तनाव और जीवन की समस्याएं होंगी समाप्त

भगवान शिव को सारा संसार पूजता है। कहते हैं की कुंडली में अगर चंद्रमा कमजोर है तो ऐसे में मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इंसान को किसी भी प्रकार का फैसला लेने में समस्या जाती है और वह इसमें असमर्थ रहता है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित किया गया है। इस दिन शुभ अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा पाठ करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

अगर आप इस दिन व्रत रखते हैं तो यह तो बहुत ही शुभ माना जाता है। व्रत करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और काल, कष्ट, दुख और संकट से छुटकारा मिलता है।

सोमवार के उपाय

अगर आपकी कुंडली में भी शुक्र और चंद्रमा की स्थिति कमजोर है तो ऐसे में भगवान शिव की पूजा आपको जरूर करनी चाहिए। अगर आप भगवान शिव की पूजा पाठ करते हैं तो ऐसे में चंद्र देव प्रसन्न होते हैं और चंद्र देव की कृपा आप पर बनी रहती है। ऐसे में सभी कार्यों में सफलता मिलती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। इस दिन अगर आप व्रत रखते हैं और भगवान शिव की भक्ति करते हैं तो ऐसे में आपको कई शुभ परिणाम मिलते हैं। जानकारी के मुताबिक अगर आप मानसिक तनाव और चिंता से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको ऐसे में भगवान शिव के इन सिद्ध मंत्रों का जाप करना चाहिए।

चंद्र मंत्र

1. ऊँ इमं देवा असपत्नं ग्वं सुवध्यं ।
महते क्षत्राय महते ज्यैश्ठाय महते जानराज्यायेन्दस्येन्द्रियाय
इमममुध्य पुत्रममुध्यै पुत्रमस्यै विश वोsमी राज: सोमोsस्माकं ब्राह्माणाना ग्वं राजा।

2. ऊँ ऐं क्लीं सोमाय नम:।
ऊँ श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नम:।
ऊँ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:।

3. ऊँ दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम ।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुटभूषणम ।।

4. ऊँ अमृतंग अन्गाये विधमहे कलारुपाय धीमहि, तन्नो सोम प्रचोदयात ।।

5. ऊँ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रतिजागृहि त्वमिष्टापूर्ते स सृजेथामयं च ।
अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन्विश्वे देवा यजमानश्च सीदत ।।

6. प्रियंगुकलिकाश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम ।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम ।।

7. ऊँ चन्द्रपुत्राय विदमहे रोहिणी प्रियाय धीमहि तन्नोबुध: प्रचोदयात ।

8. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||

ऊँ अघोरेभ्यो अथघोरेभ्यो, घोर घोर तरेभ्यः।
सर्वेभ्यो सर्व शर्वेभ्यो, नमस्ते अस्तु रूद्ररूपेभ्यः’।।

9. मामिशमीशान निर्वाण रूपं विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद स्वरूपं’।।

10. ऊँ क्लीं क्लीं क्लीं वृषभारूढ़ाय वामांगे गौरी कृताय क्लीं क्लीं क्लीं ऊँ नमः शिवाय।।

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