CG News : छत्तीसगढ़ की राजधानी से सटे नवा रायपुर, रायपुर, दुर्ग और भिलाई को मिलाकर बने विशेष क्षेत्र में अब विकास का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। शासन ने स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) के गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके बाद इस पूरे क्षेत्र में बिना एससीआर की अनुमति के न तो नई कॉलोनियों का निर्माण संभव होगा और न ही किसी उद्योग को स्थापित किया जा सकेगा। इसका सीधा असर रियल एस्टेट और औद्योगिक निवेश की दिशा पर पड़ेगा।
सरकार का मानना है कि राजधानी क्षेत्र में बेतरतीब विकास भविष्य में बड़ी समस्याएं खड़ी कर सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एससीआर का गठन किया गया है, ताकि सड़क, आवास, उद्योग, पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं का विकास एक तय योजना के तहत हो।
CG News: नवा रायपुर से भिलाई
एससीआर के जरिए पूरे क्षेत्र के लिए एक समान नियम और गाइडलाइन लागू की जाएगी। एससीआर को प्रभावी बनाने के लिए वित्त विभाग ने 210 पदों को स्वीकृति दे दी है। इससे यह साफ हो गया है कि सरकार इसे सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति को लेकर मुख्य सचिव को प्रस्ताव भेज दिया है। सीईओ की नियुक्ति के बाद एससीआर औपचारिक रूप से सक्रिय हो जाएगा।
मुख्यमंत्री करेंगे पहली बैठक की अध्यक्षता
सीईओ के पदभार संभालते ही एससीआर के संचालक मंडल की पहली बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे। इसमें नवा रायपुर में एससीआर के लिए अलग कार्यालय भवन के निर्माण और आने वाले वर्षों की विकास योजना तैयार करने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति जैसे अहम फैसले लिए जाएंगे। एससीआर के संचालन के लिए अलग-अलग विभागों के अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लिया जाएगा। इसके लिए सभी प्रमुख विभागों को पत्र भेजे जा चुके हैं। बोर्ड में मुख्यमंत्री अध्यक्ष होंगे, जबकि कैबिनेट मंत्री अरुण साव और ओपी चौधरी पदेन सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
नए नियम लागू होने के बाद रायपुर और दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में होने वाला हर विकास कार्य एससीआर की गाइडलाइन के तहत ही होगा। चाहे वह हाउसिंग प्रोजेक्ट हो या कोई औद्योगिक यूनिट। संभावना है कि अगले 15 दिनों में बोर्ड की पहली बैठक के बाद मास्टर प्लान और नई विकास गाइडलाइन सार्वजनिक कर दी जाएगी, जिससे राजधानी क्षेत्र के भविष्य की तस्वीर साफ हो जाएगी।
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