Business Tips : जब किसान की मेहनत वैज्ञानिक सोच से जुड़ती है, तो नतीजे सिर्फ फसल तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था की दिशा बदल देते हैं। जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह में ऐसा ही बदलाव देखने को मिला है। अरोमा मिशन के तहत शुरू हुई लैवेंडर की खेती ने यहां खेती की परिभाषा ही बदल दी है और इसकी खुशबू आज देशभर में महसूस की जा रही है। पहाड़ों से घिरा भद्रवाह आज ‘बैंगनी क्रांति’ का प्रतीक बन चुका है। इस पहल ने चार हजार से ज्यादा किसान परिवारों के जीवन में नया उजाला लाया है। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर किसान अब ऐसी फसल उगा रहे हैं, जिसने गांवों में रोजगार, आत्मविश्वास और नई सोच को जन्म दिया है।
यहां किसान सिर्फ लैवेंडर के फूल उगाकर ही नहीं रुक रहे। प्रशिक्षण के बाद वे तेल निकालने, साबुन, इत्र, अगरबत्ती और अन्य सुगंधित उत्पाद तैयार करने लगे हैं। यही वजह है कि भद्रवाह के उत्पाद अब देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच रहे हैं और स्थानीय पहचान को वैश्विक मंच मिल रहा है।
Business Tips: लाखों की कमाई
लैवेंडर की खेती ने आमदनी के पुराने पैमाने तोड़ दिए हैं। किसान प्रति एकड़ तीन लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक सालाना कमा रहे हैं। बीते पांच वर्षों में सिर्फ लैवेंडर तेल की बिक्री से ही दस करोड़ रुपये से अधिक की आय हो चुकी है। इससे गांवों की आर्थिक स्थिति में साफ बदलाव दिखने लगा है। करीब एक दशक पहले तक भद्रवाह के किसान मक्का और अन्य पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे। ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के तहत जब अरोमा मिशन के लिए इस क्षेत्र को चुना गया, तो सीएसआईआर जम्मू को बड़ी जिम्मेदारी मिली।
प्रशिक्षण से स्टार्टअप तक की यात्रा
किसानों को पहले प्रशिक्षण दिया गया, फिर लैवेंडर के पौधे और आधुनिक खेती के तरीके सिखाए गए। इसके बाद गांवों के युवाओं को प्रसंस्करण इकाइयां लगाने के लिए मशीनें उपलब्ध कराई गईं। यही कदम आगे चलकर स्टार्टअप संस्कृति की नींव बन गया। जम्मू-कश्मीर में अरोमा मिशन की शुरुआत 2015 में हुई थी। आज जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 1,625 हेक्टेयर क्षेत्र में लैवेंडर की खेती हो रही है। पहले चरण में 600 किसानों के साथ 164.92 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल हुआ, दूसरे चरण में 2,100 नए किसान जुड़े और तीसरे चरण में 1,500 से अधिक किसानों को लाभ मिल रहा है।
युवाओं के स्टार्टअप
खेती के साथ मूल्यवर्धन पर खास ध्यान दिया गया। ग्राम समूहों में 42 डिस्टिलेशन यूनिट स्थापित की गई हैं। अकेले डोडा जिले में पांच हजार किलोग्राम से ज्यादा लैवेंडर तेल का उत्पादन कर किसान दस करोड़ रुपये से अधिक कमा चुके हैं। अक्टूबर 2024 में जम्मू में अगरबत्ती निर्माण इकाई शुरू हुई। इसके आधार पर लैवेंडर से जुड़े 13 एग्री-स्टार्टअप खड़े हुए हैं। इन्हें बाजार से जोड़ने के लिए 12 से अधिक एमओयू किए गए, जिससे रोजगार के नए रास्ते खुले।
लैवेंडर फेस्टिवल ने भद्रवाह को पर्यटन के नक्शे पर अलग पहचान दिलाई है। हर साल होने वाले महोत्सव में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। सीएसआईआर के नेतृत्व वाले अरोमा मिशन को 2025 का राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार मिला है।
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