बिहार के बेटे पर है गर्व, मधुबनी के यश ने क्या किया ऐसा कि PM मोदी खुद करेंगे सम्मानित, जानें पूरी कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की ‘मन की बात’ से न सिर्फ देशभर के युवा, बल्कि बच्चे भी प्रेरित होते हैं. बिहार का एक ऐसा ही किशोर है यश झा, जिसने प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात से प्रेरित होकर राज्य का नाम रौशन किया है. मधुबनी के रहने वाले 15 साल के यश ने (Yash Jha) दो ऐसी कहानियां लिख डाली, जिसे लेकर प्रधानमंत्री उसे सम्मानित करने वाले हैं. यश फिलहाल मधुबनी के पॉल स्टार स्कूल के 11वीं का छात्र है. दरअसल प्रधानमंत्री ने मन की बात में युवाओं को स्थानीय वीरों की गाथा लिखने को प्रेरित किया था, ताकि अनसुने वीरों की गाथाएं दुनिया तक पहुच सके. यश ने पीएम मोदी की बातों से प्रेरित होकर दो कहानियां लिख डालीं. दोनों कहानियां ऐसी हैं जिसने देश भर के सबसे बेहतर कहानियों में जगह बनाई. आने वाले 12 जनवरी 2022 को युवा दिवस के दिन प्रधानमंत्री खुद सम्मानित करेंगे.

देश भर से आये कहानियों को नेशनल बुक ट्रस्ट और विशेषज्ञों ने परखा और फिर सबसे बेहतर कहानियों की श्रेणी में जगह दी. पहली कहानी है ‘बाबू दाई अम्मा’ और दूसरी कहानी है ‘मीना जंग जिंदगी. बाबू दाई अम्मा मिथिलांचल की एक ऐसी वीर महिला की कहानी है जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ी और महिलाओं को एकजुट कर स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति अलख जगाया. महिलाओं की शिक्षा के लिए भी समाज मे घूम घूमकर आंदोलित किया. इस गुमनाम महिला की कहानी मिथिला में गांवों में लोगों के बीच ही दबी थी, पर यश ने  उनकी वीरता और त्याग को कहानी के जरिये दुनिया के सामने लाया. यश ने केंद्र सरकार के युवा लेखक प्रोत्साहन योजना के तहत आयोजित की गई प्रतियोगिता में देश भर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. जिसमें 18 हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे, जिनमें 75 युवाओं का चयन होना था. उन चयनित 75 युवाओं में यश झा ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है. इस मुकाम को हासिल करने वाले यश झा को अब केंद्र सरकार के तरफ से हर महीने 50 हज़ार रुपये की स्कॉलरशिप मिलेगी, जो कि 6 महीने तक मिलनी है, यानी यश को कुल 3 लाख रुपये की स्कॉलरशिप मिलेगी. यश को स्कॉलरशिप के साथ बड़े लेखकों के साथ किताब लिखने की ऑनलाइन ट्रेनिंग भी मिल रही है.

बेनीपट्टी के ब्रह्मपुरा गांव निवासी रिटायर सैन्यकर्मी योगानंद झा के पौत्र एवं व्यवसायी दीपक झा के पुत्र यश यश को बचपन से ही कहानियां सुनने और कविताएं लिखने का शौक था. यश बचपन में दादी से बिना कहानी सुने सोता नहीं था. यश की दादी मीना झा और चाची आरती झा का कहना है कि वह जो भी कहानियां सुनता उसे लिखने की कोशिश करता. आज परिवार के सभी लोग यश के इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं. यश ने ना सिर्फ कहानियों के जरिये सूबे के नाम रौशन किया है, बल्कि कोरोना काल में सोशल मीडिया के जरिये जरूरतमंदों तक मदद पहुचाकर भी सुर्खियां बटोरी. एक असहाय महिला को इलाज की जरूरत थी जिसको लेकर यश ने अपने सोशल मीडिया के जरिये मुहिम चलाई और मदद पहुंचाई. यश के इस सराहनीय कार्य के लिए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने उससे बात कर हौसला बढ़ाया था.

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