डीआरई को पूरे राज्य में अपनाने के लिए एक बेहतर इकोसिस्टम बने

पटना, 24 सितम्बर: बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) और सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने राज्य के उद्योग और व्यापार समूहों के साथ आज एक वेबिनार सह कंसल्टेशन बैठक का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य राज्य की अर्थव्यवस्था के हरेक क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा समाधानों खासकर विकेन्द्रीकृत अक्षय ऊर्जा (डिसेंट्रलाइज्ड रिन्यूएबल एनर्जी – डीआरई) को बढ़ावा देने संबंधी मांगों पर सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना और इसे उनके इलेक्शन मैनिफेस्टो में शामिल कराना था. उद्योग और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से राज्य सरकार और सभी राजनीतिक दलों के समक्ष एक ऐसा इकोसिस्टम विकसित करने की मांग रखी, जो समुचित वित्त पोषण और प्रोत्साहनकारी नियमों के जरिये मैन्युफैक्चरिंग और मार्केट ढांचा तैयार करे, ताकि विकेन्द्रीकृत अक्षय ऊर्जा को राज्य भर में अंगीकार करने के लिए समुचित माहौल बने.

यह कार्यक्रम सीड के द्वारा राज्य भर में चलाये जा रहे एक पब्लिक कैंपेन “हल्ला बोल 4 क्लाइमेट” का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसके तहत चुनाव में जनता की आवाज को सभी दलों के समक्ष लाने और अक्षय ऊर्जा आधारित क्लाइमेट समाधानों के समर्थन में कई जन-जागरूकता कार्यक्रम जैसे किसान चर्चा, सिविल सोसाइटी कंसल्टेशन, सोलर संवाद यात्रा, टाउन हॉल मीटिंग, जन स्वास्थ्य सुनवाई, सोलर मेला आदि आयोजित किये जा रहे हैं, ताकि डीआरई मॉडलों से बिहार को सततशील राह पर ले जाने में मदद मिले. बिहार सरकार ने वर्ष 2022 तक 2,969 मेगावाट सौर ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य रखा है. विकेन्द्रीकृत अक्षय ऊर्जा को राज्य भर में समुचित ढंग से अपनाने से सोलर टारगेट और अक्षय ऊर्जा बाध्यता के लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, साथ ही जीवाश्म ईंधन के उपयोग से वायुमंडल में जमा हो रहे कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिलेगी.


उद्योग और व्यापार जगत की सामूहिक आवाज को सामने रखते हुए बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट श्री राम लाल खेतान ने कहा कि “स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर आधारित होने के कारण विकेन्द्रीकृत अक्षय ऊर्जा समाधानों से न सिर्फ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को दूर किया जा सकता है बल्कि इससे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन लाये जा सकते हैं, जैसे कृषि, व्यापार, सेवा और स्वास्थ्य क्षेत्र में ये नए रोज़गार के अवसर और आजीविका के स्रोत पैदा करने में सक्षम हैं. हम सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करते हैं कि वे डिसेंट्रलाइज्ड रिन्यूएबल एनर्जी पर आधारित क्लाइमेट सोल्यूशंस के लिए एक विजन रोडमैप के साथ दूरदर्शी नीतियां सामने लाएं और इसे अपने इलेक्शन मैनिफेस्टो में प्राथमिकता दें.


इस मौके पर श्री अश्विनी अशोक, हेड-रिन्यूएबल एनर्जी, सीड ने कहा कि “कोविड-19 महामारी के परिदृश्य में राज्य की अर्थव्यवस्था एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के पुनरुद्धार और विकास के लिए जरूरी ऊर्जा की मांगों की पूर्ति के लिए विकेन्द्रीकृत अक्षय ऊर्जा समाधानों को प्राथमिकता देना आज के समय की जरूरत है. डीआरई के जरिए पूरे एग्रीकल्चर वैल्यू चेन में सुधार से किसानों की बाज़ार तक और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होने से आम जनता की स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच संभव हो पाएगी. सततशील पर्यावरण और एक मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए सभी राजनीतिक दलों के चुनावी मैनिफेस्टो में डीआरई प्रमुख मुद्दा अवश्य बनना चाहिए.”


इस कार्यक्रम के दौरान उद्योग और व्यापार जगत के प्रतिनिधि, रिन्यूएबल एनर्जी डेवेलपर्स और उद्यमी मौजूद थे, जिनमें दुधवा पॉवर इंडस्ट्रीज से श्री अनूप अग्रवाल, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष श्री संजय भरतिया, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की रिन्यूएबल एनर्जी कमिटी के अध्यक्ष श्री सुबोध कुमार, श्री संजय गोयनका, सुश्री उषा झा आदि प्रमुख थे. इन सभी ने राजनीतिक दलों से डीआरई आधारित चुनावी मैनिफेस्टो तैयार करने की अपील की, ताकि राज्य की अर्थव्यस्था के लिए सतत विकास विकास की राह तैयार की जा सके और एक समृद्ध बिहार की ओर कदम बढ़ाया जा सके.

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