Bengal Election : पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले एक अजीब और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। कई ऐसे लोग हैं, जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है, लेकिन उन्हें चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस मामले ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव आयोग ने इन गड़बड़ियों को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। बीरभूम जिले के सिउड़ी-2 ब्लॉक के अनंतपुर गांव के रहने वाले शेख नजरुल इस्लाम का मामला सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। 1994 से CRPF में कार्यरत नजरुल इस समय छत्तीसगढ़ में तैनात हैं, लेकिन उन्हें बंगाल चुनाव में ड्यूटी के लिए बुलाया गया है। हैरानी की बात यह है कि पूरक मतदाता सूची में उनका नाम ही नहीं है।
इसी तरह मेदिनीपुर के शिक्षक प्रसेनजीत चक्रवर्ती और बीरभूम के प्रधान शिक्षक मोहम्मद एनामुल हक को ‘फर्स्ट पोलिंग ऑफिसर’ के तौर पर ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया। जब उन्होंने मतदाता सूची जांची, तो खुद का नाम गायब देखकर हैरान रह गए।
Bengal में वोटर लिस्ट गड़बड़ी
इनका सीधा सवाल है कि अगर कोई व्यक्ति खुद वैध मतदाता नहीं है, तो वह चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित करेगा। स्थिति तब और उलझ गई, जब चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मतदाता सूची से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आई। कई लोगों ने शिकायत की कि EPIC नंबर डालने पर उनका स्टेटस ‘विचाराधीन’ दिख रहा था। यह समस्या पूरक सूची जारी होने के बाद सामने आई, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई।
सवाल बरकरार
फिलहाल, आयोग ने दावा किया है कि वेबसाइट की तकनीकी खामी को ठीक कर लिया गया है और अब डेटा सही तरीके से दिख रहा है। बावजूद इसके, जिन लोगों के नाम सूची में नहीं हैं लेकिन उन्हें चुनावी ड्यूटी दी गई है, वह मुद्दा अभी भी अनसुलझा है। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर इस तरह की गड़बड़ियां बड़े स्तर पर सामने आती हैं, तो इससे मतदाताओं का भरोसा कमजोर हो सकता है। अब नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग जांच में क्या निष्कर्ष निकालता है और इस समस्या का समाधान कैसे करता है।
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