Bengal : इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव Bharatiya Janata Party (भाजपा) के लिए सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि संगठन की असली ताकत दिखाने का मौका बन गया है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Naveen के लिए यह पहला बड़ा चुनाव है, जहां उनकी रणनीति और नेतृत्व दोनों की परीक्षा होने वाली है। 24 और 25 मार्च को कोलकाता में दो दिवसीय प्रवास के दौरान नितिन नवीन का अंदाज पारंपरिक नेताओं से बिल्कुल अलग नजर आया। उन्होंने मंचीय भाषणों से ज्यादा संगठन के भीतर बैठकों और रणनीति पर फोकस किया। उनका पूरा जोर माइक्रो मैनेजमेंट और जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने पर रहा।
हावड़ा-हुगली और नवद्वीप जोन की बैठकों से लेकर चुनाव संचालन समिति तक, हर स्तर पर नवीन ने साफ संदेश दिया कि लड़ाई बूथ से जीती जाएगी। ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ का नारा सिर्फ कहने भर का नहीं, बल्कि उनकी पूरी रणनीति का केंद्र बन चुका है। हर कार्यकर्ता को सक्रिय कर बूथ पर पकड़ मजबूत करने की योजना पर काम तेज कर दिया गया है।
Bengal फतह की तैयारी में BJP
जिला प्रभारियों और प्रवासी नेताओं के साथ बैठक में नितिन नवीन ने साफ कहा कि यह कोई तय समय वाली नौकरी नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर जमीन पर काम नहीं कर सकते तो जिम्मेदारी छोड़ दें। इस सख्ती से साफ हो गया कि पार्टी अब सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि रिजल्ट चाहती है। नवीन की रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा कार्यकर्ता हैं। उन्होंने हर कार्यकर्ता को खुद को उम्मीदवार मानकर काम करने का संदेश दिया। उनका मानना है कि भाजपा की असली ताकत यही जमीनी कार्यकर्ता हैं, जो पूरे समर्पण के साथ चुनावी लड़ाई को आगे बढ़ाते हैं।
नैरेटिव की लड़ाई भी अहम
चुनावी रणनीति में सिर्फ संगठन ही नहीं, बल्कि मुद्दों की लड़ाई भी अहम होगी। नवीन ने इस चुनाव को All India Trinamool Congress (तृणमूल) के ‘भय’ बनाम भाजपा के ‘भरोसे’ की लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश की है। यह नैरेटिव आने वाले दिनों में चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है। 4 मई को आने वाले नतीजों को लेकर पार्टी के अंदर उत्साह भी है और दबाव भी। नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं से ‘भगवा होली’ खेलने की बात कहकर जीत का भरोसा जताया है। अब देखना यह होगा कि उनकी बूथ-केंद्रित रणनीति बंगाल की सियासत में कितना असर दिखा पाती है।
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