Bengal Election : केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने सोमवार को दक्षिण 24 परगना में पार्टी की ‘परिवर्तन यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर 2026 विधानसभा चुनाव का आगाज कर दिया। मथुरापुर की सभा में उन्होंने साफ कहा कि यह यात्रा केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि “नीतियों के बदलाव” के लिए है। मंच से दिए गए संदेश में संगठनात्मक ऊर्जा के साथ चुनावी वादों की झड़ी भी दिखी।
सभा में बड़ा ऐलान करते हुए शाह ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर राज्य में 7वां वेतन आयोग लागू किया जाएगा। उनका आरोप था कि मौजूदा सरकार ने कर्मचारियों को 6वें वेतन आयोग पर ही रोके रखा है।
Bengal में भाजपा का बिगुल
उन्होंने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताते हुए भरोसा दिलाया कि बकाया मुद्दों का समयबद्ध समाधान किया जाएगा। महिलाओं के सशक्तिकरण को चुनावी एजेंडा बनाते हुए शाह ने 5,700 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का वादा किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, आर्थिक सहायता और कौशल विकास के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। मंच से यह भी दोहराया गया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी।
उम्र में छूट
युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन देते हुए शाह ने कहा कि खाली पदों को भरा जाएगा। हजारों पदों पर आवेदन का मौका न मिलने की बात उठाते हुए उन्होंने भर्ती के लिए आयु सीमा में पांच साल की विशेष छूट देने की घोषणा की। उनका कहना था कि इससे लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी। सभा में 2024 की एक चर्चित घटना का जिक्र करते हुए शाह ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा भाजपा की प्राथमिकता होगी और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। भीड़ के बीच इस मुद्दे पर तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली।
तृणमूल पर घुसपैठ का आरोप
Mamata Banerjee की सरकार पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि राज्य को घुसपैठ, भ्रष्टाचार और “सिंडिकेट राज” से मुक्त कराना परिवर्तन यात्रा का लक्ष्य है। बजट आवंटन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की तुलना में मदरसों को अधिक राशि देने का मुद्दा भी उछाला और इसे तुष्टीकरण की नीति बताया। दक्षिण 24 परगना की रैली ने साफ संकेत दे दिए हैं कि 2026 का चुनाव विकास, वेतन आयोग, महिला सुरक्षा और युवाओं की नौकरियों जैसे मुद्दों पर लड़ा जाएगा। आने वाले महीनों में राजनीतिक बयानबाजी और वादों की रफ्तार और तेज होने के आसार हैं।
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