Ayodhya Temple : अयोध्या विवाद से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्यों की खोज में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डा. बीआर मणि को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। इस सम्मान को लेकर उन्होंने संतोष और कृतज्ञता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पुरातत्व विज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए किए गए वर्षों के समर्पण की मान्यता है।
वर्ष 1955 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के बस्ती क्षेत्र में जन्मे डॉ. बीआर मणि का जीवन शिक्षा, शोध और इतिहास की खोज से जुड़ा रहा है। उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा वाराणसी में बिताया, जहां उन्होंने अध्ययन, अध्यापन और शोध कार्य किए।
Ayodhya Temple अवशेष
सारनाथ क्षेत्र के सारंगनाथ कॉलोनी में उनका निवास रहा, जो उनके जीवन की बौद्धिक और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र बना। डॉ. मणि ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक के बाद प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1980 में उन्होंने ‘कुषाण युग में जीवन’ विषय पर पीएचडी प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बीएचयू के पुरातत्व विभाग में अध्यापन किया और केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में भी शिक्षण कार्य किया। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उन्हें देश के अग्रणी पुरातत्व विशेषज्ञों में स्थापित किया।
प्रमुख जिम्मेदारियां
संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से वर्ष 1984 में उनका चयन उप अधीक्षक पुरातत्वविद् के पद पर हुआ। इसके बाद उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और वर्ष 2015 में अतिरिक्त महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद वे राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक, नोएडा स्थित हेरिटेज संस्थान के वाइस चांसलर और वर्तमान में भारतीय पुरातत्व परिषद के वाइस चेयरमैन के रूप में कार्य कर रहे हैं।
बचपन की जिज्ञासा
डा. बीआर मणि की रुचि बचपन से ही पुरातत्व में रही। उनके घर के पास स्थित एक प्राचीन स्थल ने उनके मन में इतिहास को लेकर गहरी जिज्ञासा पैदा की। वे अपने पिता और दादी के साथ वहां जाया करते थे और मात्र दस वर्ष की उम्र में ब्राह्मी लिपि का अच्छा ज्ञान प्राप्त कर चुके थे। उनके परिवार में भी पुरातत्व की परंपरा रही, जिससे उनकी रुचि और मजबूत हुई। डा. मणि ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों में पुरातात्विक सर्वेक्षण और उत्खनन कार्य किए। उन्होंने 14 से अधिक प्रमुख उत्खनन परियोजनाओं का निर्देशन किया और अनेक ऐतिहासिक स्थलों की खोज की।
अयोध्या उत्खनन
उनके नाम छह पुस्तकें और 200 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं, जो भारतीय इतिहास और संस्कृति के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान हैं। वर्ष 2003 में अदालत के निर्देश पर डा. बीआर मणि ने अयोध्या के विवादित स्थल पर उत्खनन का नेतृत्व किया। उनकी टीम ने प्राचीन ढांचे के अवशेषों की खोज की, जिन्हें मंदिर से जुड़ा प्रमाण माना गया। इन निष्कर्षों ने 2019 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और ऐतिहासिक सत्य की पुष्टि में योगदान दिया।




