Atanu Chakraborty : देश के बैंकिंग सेक्टर में उस समय हलचल मच गई जब Atanu Chakraborty ने अचानक HDFC Bank के पार्ट-टाइम चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले ने कॉरपोरेट जगत और शेयर बाजार दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस्तीफे के साथ ही उन्होंने बैंक की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ गंभीर सवाल भी उठाए, जिससे पूरे मामले की चर्चा और तेज हो गई है।
अतानु चक्रवर्ती पिछले कुछ वर्षों से एचडीएफसी बैंक के बोर्ड से जुड़े हुए थे। वह बैंक के अंशकालिक अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे थे और बैंक की नीतिगत दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते थे।
Atanu Chakraborty ने चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा
उनके इस्तीफे को बैंकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि एचडीएफसी बैंक देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक है। अतानु चक्रवर्ती भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। वह गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी थे और उन्हें पब्लिक पॉलिसी तथा वित्तीय प्रशासन के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव रहा है। सरकारी सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और आर्थिक नीतियों से जुड़े अहम फैसलों में भी भूमिका निभाई।
वित्त मंत्रालय में निभाई अहम भूमिका
अपने प्रशासनिक करियर के दौरान चक्रवर्ती ने Ministry of Finance के अंतर्गत आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव के रूप में भी काम किया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने वित्तीय नीतियों, निवेश और आर्थिक रणनीतियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में योगदान दिया। इसके अलावा वह निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग से भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने सरकार के विनिवेश कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई। सिविल सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद अतानु चक्रवर्ती ने कॉरपोरेट क्षेत्र में अपनी नई पारी शुरू की। अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव और नीतिगत समझ के कारण उन्हें कई कंपनियों के बोर्ड स्तर पर काम करने का मौका मिला। कॉरपोरेट गवर्नेंस और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मामलों में उनकी विशेषज्ञता को काफी महत्व दिया जाता रहा है।
2021 में जुड़े थे एचडीएफसी बैंक से…
मई 2021 में अतानु चक्रवर्ती एचडीएफसी बैंक के बोर्ड में एक स्वतंत्र निदेशक के रूप में शामिल हुए थे। इसके बाद उनकी भूमिका और जिम्मेदारियां बढ़ती गईं और उन्हें बैंक का पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने बैंक की रणनीतिक दिशा और संचालन से जुड़े कई अहम निर्णयों में भागीदारी निभाई। हालांकि उनके अचानक इस्तीफे और बैंक की कार्यप्रणाली पर लगाए गए आरोपों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंकिंग और कॉरपोरेट जगत के विशेषज्ञ इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहे हैं। आने वाले समय में यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस फैसले के पीछे असल वजह क्या रही और इसका बैंक के कामकाज पर क्या असर पड़ सकता है।
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