पंचायती राज कानून बदलने को बिहार में मंजूरी

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देशन में बिहार कैबिनेट की आज एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है, इसमें पंचायती राज कानून में संशोधन के साथ ही 17 अन्य एजेंडों पर मुहर लगाई गई है। सबसे मुख्य एजेंडा पंचायती राज कानून में बदलाव के प्रस्ताव का है। जैसा भास्कर ने पहले ही बता दिया था 15 जून के बाद मुखिया जी का पावर खत्म, अब इसपर कैबिनेट की भी मुहर लग गई है। अब इसे राज्यपाल के पास उनके हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। इस संशोधन के बाद अब त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों (वार्ड सदस्य, सरपंच, मुखिया) का काम परामर्शी समिति को सौंप दिया जाएगा। बिहार के करीब 2.5 लाख पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 15 जून को समाप्त हो रहा है।

क्या मतलब है परामर्शी समिति का

बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कोरोना के कारण समय पर नहीं हो सके और अब बरसात के कारण 3 महीने तक यह संभव नहीं दिख रहा है। पंचायती राज के करीब ढाई लाख प्रतिनिधियों का कार्यकाल 15 जून को खत्म होता देख राज्य सरकार ने यह बीच का रास्ता निकाला है। इसके अनुसार अब कार्यकाल खत्म होने के बाद इनके अधिकार और कर्तव्य उप विकास आयुक्त (DDC), प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और पंचायत सचिव के हाथों में चले जाएंगे।
पंचायत चुनाव टलने पर कार्यकाल बढ़ाने का कानून नहीं है, इसलिए सरकार कैबिनेट के रास्ते राज्यपाल के हस्ताक्षर से अध्यादेश जारी कर अपने स्तर से प्रशासक तय करने की व्यवस्था लागू करेगी। चुनाव के बाद नए पंचायत प्रतिनिधियों की शक्तियां कायम रहें, इसके मद्देनजर अफसरों को नई योजना लाने का अधिकार नहीं सौंपा जाएगा। इसके अलावा चालू योजनाओं को चलाते रहने लायक ही आर्थिक शक्तियां उन्हें सौंपी जाएगी।

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