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Ajit Pawar की आखिरी इच्छा, जिसे पूरा करने का देखा था ख्वाब; जानें अब पार्टी क्या लेगी फैसला?

Ajit Pawar
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Ajit Pawar : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार के निधन के बाद राज्य की राजनीति में शोक के साथ-साथ नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विमान दुर्घटना में हुई उनकी असमय मौत ने न केवल उनके समर्थकों को बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। विद्या प्रतिष्ठान से जुड़े और पवार परिवार के करीबी माने जाने वाले किरण गुजर ने अंतिम संस्कार के बाद बड़ा खुलासा किया।

उन्होंने कहा कि अजित पवार की अंतिम इच्छा थी कि एनसीपी के दोनों गुट आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट हों। उनके अनुसार, अजित पवार चाहते थे कि पार्टी की बिखरी हुई ताकत फिर से एक मंच पर आए और संगठन मजबूत बने।

Ajit Pawar की आखिरी इच्छा

किरण गुजर ने बताया कि अजित पवार से उनकी आखिरी फोन कॉल में चुनाव से जुड़े कुछ जरूरी कागजातों की चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि पार्टी और संगठन के भविष्य को लेकर अजित पवार लगातार सक्रिय और चिंतित रहते थे। उनके मुताबिक, पार्टी को एक रखने का विचार उनके मन में लंबे समय से था। सूत्रों के अनुसार, एनसीपी और एनसीपी (एससीपी) के बीच पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में पहले ही तालमेल देखा गया था। आने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों को लेकर भी दोनों गुटों के बीच गठबंधन की बातचीत चल रही थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजित पवार की इच्छा इस प्रक्रिया को गति देने का काम कर सकती है।

राजनीतिक अटकलें तेज

अजित पवार के निधन के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि अब एनसीपी की कमान किसके हाथ में होगी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद पर कौन बैठ सकता है। शिवसेना नेता शायना एनसी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला पूरी तरह पार्टी का आंतरिक विषय है और फिलहाल अटकलों से बचना चाहिए। शायना एनसी ने कहा कि अजित पवार की मौत महाराष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति है और इस समय राजनीति से ज्यादा मानवीय संवेदना की जरूरत है। उन्होंने अपील की कि पार्टी और परिवार को शोक मनाने का समय दिया जाए, क्योंकि राजनीति बाद में भी की जा सकती है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अजित पवार की अंतिम इच्छा के अनुसार एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होंगे या फिर पार्टी में सियासी खींचतान जारी रहेगी। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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