एक पदक हारते ही लोगों ने उन्हें निर्जीव समझ लिया- विनेश फोगाट

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टोक्यो ओलंपिक समाप्त हो चुका है और सभी भारतीय खिलाड़ी स्वदेश लौट चुके हैं। वतन वापसी के बाद लगातार पदक विजेताओं का सम्मान और स्वागत किया जा रहा है और उनपर धनवर्षा भी हो रही है। लेकिन इन सबके बीच भारत की शीर्ष महिला पहलवान विनेश फोगाट भी लगातार चर्चा में बनी हुई है। टोक्यो से लौटने के बाद उन्हें भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) ने अनुशासनहीनता की वजह से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया और 16 अगस्त तक अपना पक्ष रखने का समया दिया।बता दें कि तमाम आलोचनाओं के बाद अब फोगाट ने पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में अपना पक्ष रखने के साथ-साथ फेडरेशन पर भी सवाल उठाए हैं। फोगाट ने कहा है कि एक पदक हारते ही लोगों ने उन्हें निर्जीव समझ लिया। विनेश ने कहा कि उनके दिमाग में फिलहाल दो तरीके के ख्याल चल रहे हैं। एक ख्याल कहता है कि उन्हें अब कुश्ती से दूर हो जाना चाहिए तो वहीं दूसरा ख्याल कहता है कि बिना लड़े दूर होना उनकी सबसे बड़ी हार होगी। उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसा लग रहा है कि मैं सपने में सो रही हूं। पिछले एक हफ्ते से मेरे अंदर काफी कुछ चल रहा है। मैं एकदम खाली महसूस कर रही हूं।’

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