Adani Energy : अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए अपने मेगा एचवीडीसी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए जापान के प्रमुख बैंकों से दीर्घकालीन फंडिंग जुटा ली है। कंपनी के मुताबिक यह फाइनेंसिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ग्रीन एनर्जी योजनाओं पर बढ़ते भरोसे का संकेत है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना 6,000 मेगावाट ग्रीन एनर्जी को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में सक्षम होगी। इतनी बिजली उत्तर भारत के करीब छह करोड़ घरों की जरूरत पूरी कर सकती है। माना जा रहा है कि इससे न केवल घरेलू उपभोक्ताओं बल्कि उद्योगों को भी स्थिर और स्वच्छ बिजली सप्लाई मिलेगी।
इस ट्रांसमिशन लाइन की लंबाई करीब 950 किलोमीटर होगी, जो राजस्थान के भादला सोलर पार्क से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर तक फैली रहेगी। यह कॉरिडोर 2029 तक चालू होने की उम्मीद है। इसके जरिए राजस्थान के सौर ऊर्जा बहुल इलाकों से बिजली राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचेगी।
Adani Energy को जापान का साथ
कंपनी का कहना है कि यह लाइन भारत की ग्रीन ट्रांसमिशन व्यवस्था की रीढ़ साबित होगी। बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक स्वच्छ बिजली पहुंचाने में यह एक अहम कड़ी बनेगी, जिससे देश की बढ़ती ऊर्जा मांग को टिकाऊ तरीके से पूरा किया जा सकेगा। एईएसएल के सीईओ कंदर्प पटेल ने कहा कि जापानी बैंकों और हिताची जैसी कंपनियों का समर्थन भारत-जापान के मजबूत रिश्तों को दर्शाता है। यह सहयोग सिर्फ फंडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक और दीर्घकालीन सोच का भी उदाहरण है।
आधुनिक तकनीक
इस परियोजना में हिताची की अत्याधुनिक एचवीडीसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे बीएचईएल के साथ मिलकर लागू किया जाएगा। इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बल मिलेगा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ेगा। यह प्रोजेक्ट अदाणी ग्रुप के व्यापक क्लीन एनर्जी प्लेटफॉर्म का हिस्सा है। राजस्थान, अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के लिए प्रमुख उत्पादन केंद्र है, जहां बनी बिजली आगे ट्रांसमिशन नेटवर्क के जरिए देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचती है।
मुंबई में भी दिख रहा असर
अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड अपनी कुल बिजली आपूर्ति में पहले ही 40 प्रतिशत से अधिक रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल कर रही है। इससे मुंबई दुनिया के उन बड़े शहरों में शामिल हो गया है, जहां स्वच्छ ऊर्जा का प्रभावी उपयोग हो रहा है। जापानी रेटिंग एजेंसी जेसीआर से मिली बीबीबी (स्टेबल) क्रेडिट रेटिंग भी भारत-जापान के बीच बढ़ते वित्तीय और औद्योगिक सहयोग को रेखांकित करती है। यह रेटिंग भारत की सॉवरेन रेटिंग के अनुरूप मानी जा रही है।
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