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धार की भोजशाला को लेकर उठा नया विवाद, कानूनी लड़ाई हुई और तेज

धार की भोजशाला को लेकर फिर एक बार विवाद उठ गया है। धार की भोजशाला के ही टूटे हुए अवशेषों और पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में परिसर के तिल को लेकर कानूनी लड़ाई लगातार बढ़ती जा रही है जिसको लेकर मुस्लिम पक्ष अब कोर्ट जाने की तैयारी में जुट गया है। धार की भोजशाला को लेकर परिसर में लंबे समय से शवों को दफनाने के मामले में विवाद बढ़ता जा रहा है यहां पर कई परिवारों के सदस्यों की मौत होने पर परिसर में ही उनको दफनाया जाता था।

हालांकि हिंदू समाज द्वारा इसका लगातार विरोध होता नजर आ रहा था विवाद बढ़ता देख साल 1997 में तत्कालीन कलेक्टर ने एक आदेश जारी किया। जिसमें यहां पर शवों को दफनाने को लेकर रोक लगा दी थी। यहां पर अंतिम संस्कार भी बंद कर दिए गए थे साथ ही यहां मस्जिद के सामने वाले कई हिस्सों में पुरानी कब्रें भी मौजूद नजर आएगी।

एएसआई ने किया सर्वे

इस मामले में एएसआई ने सर्वे किया जिसमें इस बात की जानकारी सामने आई है की कब्रों को बनाने में पत्थरों का इस्तेमाल किया गया जो भोजशाला के हिस्सों को तोड़ने के बाद मंदिर के रूप में वहां पड़े थे। इतना ही नहीं इस बारे में जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। लेकिन इस बात को लेकर जानकारी साफ है कि शहर में अलग कब्रिस्तान होने के बाद भी लोग शवों को दफनाने के लिए भोजशाला परिसर का है इस्तेमाल करते थे।

भोजशाला के हिस्से पर मिली कई आकृतियां

गौशाला के उस हिस्से में जहां पर मस्जिद बनी हुई थी वहां देखने पर पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली है जो ऐसा बिल्कुल नहीं दर्शाती कि वहां मस्जिद का निर्माण हुआ था इसके अलावा इस बात को भी साफ करती है कि आमतौर पर मस्जिद निर्माण में ऐसी आकृतियां नहीं मिलती है कुछ शिलालेखों पर पशुओं की आकृतियां भी बनी हुई है वही परिसर के लगभग 50 से ज्यादा शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयते भी लिखी देखने को मिली।

मुस्लिमों ने दी चुनौती

वही मुस्लिम समाज की बात करें तो उनकी तरफ से एएसआई की सर्वे रिपोर्ट को गलत बताया इतना ही नहीं इन्होंने कोर्ट को चुनौती देने का फैसला भी किया है। वही धार के मुस्लिम प्रतिनिधियों ने वकीलों के मशविरा शुरू कर दिए हैं और कोर्ट ने रिपोर्ट पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 16 मार्च तक का समय दे दिया है।

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