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Dussehra पर रावण के साथ जलेगा 30 फीट का कॉकरोच का पुतला, CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिया जवाब; छिड़ गई चर्चा

Dussehra 2026

Dussehra 2026 : देश की राजधानी दिल्ली में दशहरे के आयोजन को लेकर एक अनोखी पहल चर्चा में आ गई है। हर साल दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है, लेकिन इस बार एक रामलीला समिति ने इनके साथ कॉकरोच का पुतला भी जलाने का फैसला किया है। खास बात यह है कि देश में कॉकरोच मूवमेंट और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच इस आयोजन को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, आयोजकों ने इसे राजनीति से अलग स्वच्छता का संदेश देने वाली पहल बताया है।

Dussehra 2026

बता दें कि दिल्ली के पीतमपुरा स्थित नेताजी सुभाष प्लेस (NSP) मैदान में श्री केशव रामलीला समिति ने 30 फीट ऊंचा कॉकरोच का पुतला तैयार कराया है। समिति की योजना दशहरे के मौके पर पारंपरिक पुतलों के साथ इसका भी दहन करने की है।

Dussehra 2026

आयोजकों का कहना है कि इस पहल के माध्यम से समाज में साफ-सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बुराइयों को समाप्त करने का संदेश दिया जाएगा। कॉकरोच के पुतले को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हुई तो कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुतला दहन से जुड़ी एक न्यूज पोस्ट को दोबारा साझा करते हुए लिखा, “फ्री में पब्लिसिटी करने के लिए शुक्रिया।”

उनकी इस प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चा होने लगी। जहां आयोजन को कुछ लोग कॉकरोच मूवमेंट से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं समिति का कहना है कि इसके पीछे किसी राजनीतिक संगठन का विरोध करने का उद्देश्य नहीं है।

कॉकरोच का पुतला

श्री केशव रामलीला समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल ने इस फैसले को लेकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि कॉकरोच का पुतला बनाने का उद्देश्य राजनीतिक संदेश देना नहीं, बल्कि स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना है। आयोजकों के अनुसार, कॉकरोच को गंदगी और अस्वच्छ वातावरण के प्रतीक के रूप में दिखाया जा रहा है। इसके माध्यम से घरों, आसपास के क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की जरूरत पर ध्यान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। समिति ने इस आयोजन को स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली जैसे अभियानों की भावना से भी जोड़ा है।

रावण की सेना

इस बार रामलीला में कॉकरोच को रावण की सेना के एक असुर के रूप में प्रस्तुत करने की योजना बनाई गई है। आयोजकों का मानना है कि दशहरे पर बुराई के प्रतीकों का दहन करने की परंपरा के माध्यम से स्वच्छता का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। समिति पहले भी सामाजिक समस्याओं को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने के लिए विशेष पुतले तैयार करा चुकी है। इनमें आतंकवाद और नक्सलवाद जैसे विषय शामिल रहे हैं। इस बार कॉकरोच का पुतला उसी क्रम में तैयार किया गया है।

4 दिन में तैयार हुआ पुतला

रामलीला समिति के मुताबिक, रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के बड़े पुतलों को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगता है। इसके मुकाबले कॉकरोच का ढांचा तैयार करने में तीन से चार दिन लगे हैं। करीब 30 फीट ऊंचे इस पुतले को पारंपरिक दशहरा आयोजन का हिस्सा बनाने की तैयारी की गई है। फिलहाल, कॉकरोच के पुतला दहन को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आयोजन समिति इसे स्वच्छता अभियान से जोड़ रही है, जबकि CJP संस्थापक की प्रतिक्रिया ने मामले को नया राजनीतिक रंग दे दिया है। ऐसे में दिल्ली का यह अनोखा दशहरा आयोजन चर्चा का विषय बना हुआ है।

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