UP Politics : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में आयोजित शिक्षक सम्मेलन के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने राज्यसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की बात करने वाली सपा ने टिकट देते समय इन वर्गों को प्राथमिकता नहीं दी।
CM योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सपा के PDA फॉर्मूले पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए इसे ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ और ‘पराया धन अपना’ से जोड़ा। योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार PDA की बात करती है, लेकिन राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में उसका यह समीकरण दिखाई नहीं दिया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा ने एक राज्यसभा सीट पर अपने वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव को उम्मीदवार बनाया, जबकि दूसरी सीट पर कारोबारी धनराज परिमल नाथवानी को मौका दिया। उन्होंने सवाल किया कि पार्टी चाहती तो काशी, गाजीपुर या बलिया के किसी यादव नेता को राज्यसभा भेज सकती थी। इसके अलावा दलित, पिछड़े या अल्पसंख्यक समुदाय से भी किसी नेता को उम्मीदवार बनाया जा सकता था। समाजवादी पार्टी ने 30 सितंबर को राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया था। दोनों ने लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था।
धनराज नाथवानी उद्योग जगत से जुड़े कारोबारी हैं और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। उनके पिता परिमल नाथवानी झारखंड से राज्यसभा सदस्य हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी को लेकर भाजपा नेताओं ने सपा पर सवाल उठाए।
10 सीटों पर निर्विरोध चुनाव
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने आठ और समाजवादी पार्टी ने दो उम्मीदवार उतारे थे। सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा गया। इसके बाद 9 अक्टूबर को सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। इनमें राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी भी शामिल थे। समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को साथ लाने की रणनीति पर जोर दे रही है। ऐसे में भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे सपा की कथनी और करनी से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
वहीं, सपा की ओर से नाथवानी के चयन को कारोबारी जगत से संबंध मजबूत करने की रणनीति के रूप में पेश किया गया है। फिलहाल राज्यसभा चुनाव के बाद शुरू हुई यह बहस 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बन गई है।
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