UP Election 2027 : उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी बिसात बिछने के साथ लखीमपुर सदर सीट पर भी सियासी पारा चढ़ने लगा है। यह वही सीट है जहां कभी समाजवादी पार्टी ने लगातार पांच चुनाव जीतकर मजबूत किला तैयार किया था, लेकिन 2017 में बीजेपी के योगेश वर्मा ने इस सिलसिले को तोड़ दिया। 2022 में भी उन्होंने जीत दोहराई और लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। अब कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट उत्कर्ष वर्मा की वजह से आया है। 2012 में लखीमपुर से विधायक रहे उत्कर्ष 2017 और 2022 में योगेश वर्मा से हार गए थे, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा के टिकट पर खीरी संसदीय सीट जीतकर वापसी की।
ऐसे में 2027 से पहले सवाल सिर्फ बीजेपी की हैट्रिक का नहीं है। नजर इस बात पर भी है कि सांसद बन चुके उत्कर्ष वर्मा की मौजूदगी में सपा लखीमपुर सदर के लिए किस चेहरे पर दांव लगाती है।
UP Election 2027
2017 में बीजेपी ने योगेश वर्मा को उतारा तो उन्होंने सपा के उत्कर्ष वर्मा को 37,748 वोट से हराया। 2022 में दोनों फिर आमने-सामने आए। इस बार योगेश को 1,27,663 और उत्कर्ष को 1,07,085 वोट मिले। जीत का अंतर घटकर 20,578 रह गया, लेकिन बीजेपी सीट बचाने में सफल रही। बीजेपी खेमे की रणनीति मौजूदा सरकार के विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं को आगे रखने की है। विधायक योगेश वर्मा का दावा रहा है कि क्षेत्र में 2017 के बाद हुए काम और केंद्र-प्रदेश की योजनाओं का लाभ बीजेपी के पक्ष में जाएगा। हालांकि चुनाव से पहले स्थानीय सड़क, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे भी बहस का हिस्सा बने हुए हैं।
सांसद ने बढ़ाई उम्मीद
सपा के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव बड़ा आधार बन गया है। उत्कर्ष वर्मा ने खीरी लोकसभा सीट जीतकर बीजेपी से यह सीट छीन ली थी। ऐसे में पार्टी विधानसभा चुनाव में भी इस राजनीतिक बढ़त को भुनाने की कोशिश करेगी। हालांकि 2027 में लखीमपुर सदर से उम्मीदवार कौन होगा, इस पर अभी आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।लखीमपुर का सामाजिक समीकरण चुनाव को दिलचस्प बनाता है। उपलब्ध अनुमानों में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 24.4 प्रतिशत और अनुसूचित जाति की लगभग 20 प्रतिशत बताई गई है। इसके अलावा कुर्मी, लोध, यादव, मौर्य, ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य समुदाय भी यहां महत्वपूर्ण हैं। इसलिए किसी एक जातीय समूह को अपने दम पर निर्णायक मानने के बजाय कई समुदायों के समर्थन का गठजोड़ अहम रहेगा।
कुर्मी चेहरों के इर्द-गिर्द घूमती रही राजनीति
सीट के पिछले चुनावों में कुर्मी नेतृत्व का प्रभाव साफ दिखाई देता है। सपा के उत्कर्ष वर्मा और बीजेपी के योगेश वर्मा इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। 2012 में उत्कर्ष ने 82,713 वोट लेकर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2017 और 2022 में योगेश वर्मा विजयी रहे। लखीमपुर सीट का बड़ा हिस्सा ग्रामीण है। उपलब्ध जनसांख्यिकीय प्रोफाइल के मुताबिक करीब 62.48 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 37.52 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में बाढ़, सड़क और ग्रामीण सुविधाओं के साथ शहर की नागरिक समस्याएं भी चुनावी एजेंडे में जगह बना सकती हैं।
टिकट पर टिका दांव
फिलहाल, बीजेपी या सपा ने 2027 के लिए इस सीट से उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। योगेश वर्मा लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं, जबकि सपा के पुराने चेहरे उत्कर्ष वर्मा अब सांसद हैं। इसलिए असली दिलचस्पी सपा के अगले विधानसभा चेहरे और बीजेपी की टिकट रणनीति में होगी। उम्मीदवार सामने आने के बाद ही साफ होगा कि लखीमपुर में पुरानी प्रतिद्वंद्विता नए रूप में लौटती है या 2027 में कोई नया चेहरा पूरा चुनावी समीकरण बदलता है।
Read More : UP Politics: 71 सीटों पर BJP का फोकस, नितिन नवीन ने बूथ तक परखी तैयारी; क्यों अहम है पश्चिमी UP?




