Nepal Gas Crisis : नेपाल की राजधानी काठमांडू में रसोई गैस की उपलब्धता एक बार फिर लोगों के लिए चिंता का कारण बन गई है। ईरान युद्ध के बाद एलपीजी आपूर्ति पर पड़े असर से शुरू हुआ संकट पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ था कि अब सप्लाई व्यवस्था को एक और झटका लगा है। राजधानी के कई इलाकों में लोग खाली सिलेंडर लेकर गैस डिपो के बाहर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। कुछ समय पहले स्थिति में सुधार के बाद नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने 14।2 किलो वाले पूरे एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति दोबारा शुरू की थी।
लोगों को उम्मीद थी कि अब रसोई गैस की समस्या खत्म हो जाएगी। लेकिन पृथ्वी हाईवे पर कृष्णभीर के पास हुए भूस्खलन ने काठमांडू घाटी तक पहुंचने वाली सप्लाई व्यवस्था को फिर प्रभावित कर दिया।
Nepal Gas Crisis
गैस की कमी का असर सीधे आम परिवारों पर दिखाई दे रहा है। कई जगह लोग खाली सिलेंडर लेकर डिपो पहुंच रहे हैं। वहां पहले नाम दर्ज कराया जा रहा है और इसके बाद कूपन या टोकन दिया जा रहा है। इसके बावजूद लोगों को यह भरोसा नहीं है कि अगली बार पहुंचने पर उन्हें सिलेंडर मिल ही जाएगा। लंबी कतारों ने राजधानी में गैस संकट की गंभीरता को सामने ला दिया है। नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन का कहना है कि मुख्य सड़क पर रुकावट के बावजूद वैकल्पिक मार्गों के जरिए काठमांडू घाटी में एलपीजी भेजी जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह शुक्रवार और शनिवार को ही 63,383 सिलेंडर घाटी तक पहुंचाए गए। सरकारी स्तर पर आपूर्ति जारी रहने का दावा किया जा रहा है, लेकिन उपभोक्ताओं को इसका फायदा पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है।
कम मिल रहे सिलेंडर
गैस डीलरों की परेशानी भी संकट को बढ़ा रही है। उनका कहना है कि उन्हें जितनी मात्रा में सिलेंडर की जरूरत है, उसके मुकाबले कम आपूर्ति मिल रही है। ऐसे में उनके लिए सभी ग्राहकों की मांग पूरी करना संभव नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि राजधानी में गैस पहुंचने के बावजूद लोगों को आसानी से सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। मौजूदा स्थिति के लिए पृथ्वी हाईवे पर हुआ भूस्खलन निश्चित तौर पर एक बड़ा कारण है, लेकिन समस्या केवल सड़क बाधित होने तक सीमित नहीं मानी जा रही। गैस की कमी की आशंका में लोग अतिरिक्त सिलेंडर रखने लगते हैं। संकट कम होने पर बड़ी संख्या में खाली सिलेंडर एक साथ बाजार में लौटते हैं, जिससे वितरण व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है।
कालाबाजारी की आशंका
नेपाल में एलपीजी की कमी के दौरान जमाखोरी और कालाबाजारी के आरोप भी सामने आते रहे हैं। त्योहारों का मौसम नजदीक होने के कारण मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में आशंका है कि कुछ लोग ज्यादा मुनाफे की उम्मीद में सिलेंडर जमा कर सकते हैं। सरकार के सामने इस तरह की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाना बड़ी चुनौती होगी। एक और समस्या एलपीजी भंडारण को लेकर स्पष्ट नियमों की कमी से जुड़ी है। परिवार या किसी कारोबार के पास कितने सिलेंडर होने चाहिए, इसे लेकर स्पष्ट सीमा नहीं होने से संकट के समय अतिरिक्त स्टॉक जमा होने की आशंका रहती है। ऐसे में सिलेंडर रखने की सीमा तय करने की जरूरत पर भी चर्चा तेज हो गई है।
होटल और छोटे कारोबार भी संकट में
गैस की कमी का असर सिर्फ घरेलू रसोई तक सीमित नहीं है। छोटे होटल, रेस्टोरेंट और खाने-पीने की दुकानें भी प्रभावित हो रही हैं। इन कारोबारों के लिए खाना बनाने के लिए लगातार एलपीजी की जरूरत होती है। पर्याप्त गैस नहीं मिलने पर कई छोटे कारोबारी अपना काम सीमित करने या अस्थायी रूप से बंद करने को मजबूर हो सकते हैं नेपाल में दीपावली का त्योहार नजदीक आने के साथ एलपीजी की मांग बढ़ने की संभावना है। अगर तब तक आपूर्ति व्यवस्था सामान्य नहीं हुई तो संकट और गहरा सकता है। सरकार के सामने पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध कराने के साथ जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम लगाने की चुनौती है। सबसे जरूरी यह है कि लोगों के बीच यह भरोसा कायम किया जाए कि आने वाले दिनों में खाना बनाने की गैस की कमी नहीं होगी।




