BRICS : दिल्ली की सियासत में मुद्दा चाहे संसद का हो या दुनिया के मंच पर भारत की भूमिका का, भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। अब BRICS सम्मेलन को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने जहां BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों से भारत को मिलने वाले प्रत्यक्ष फायदे पर सवाल उठाए, वहीं भाजपा के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी और चिदंबरम को निशाने पर ले लिया। मामला यहीं नहीं रुका। पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए उसे तंजिया अंदाज में “राहुल ग्राम” तक कह दिया।
शहजाद पूनावाला का कहना है कि BRICS को किसी राजनीतिक दल के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय हित से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच है। उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर आज BRICS से कोई फायदा नजर नहीं आता, तो यूपीए सरकार के दौरान भारत में आयोजित BRICS सम्मेलन को लेकर कांग्रेस का नजरिया क्या था।
BRICS पर आमने-सामने
पूनावाला ने अपने वीडियो के जरिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी। चिदंबरम पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस उस अंतरराष्ट्रीय मंच की उपयोगिता पर सवाल उठा रही है, जिसे उसके शासनकाल में भी भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था। पूनावाला ने इसी विरोधाभास को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि विदेश नीति किसी एक पार्टी की निजी संपत्ति नहीं हो सकती। भाजपा नेता ने अपने एक्स पोस्ट में एक और विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने दावा किया कि BRICS को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाने वाला उनका वीडियो इंस्टाग्राम पर दबा दिया गया।
Made a video exposing how Congress is showing hypocrisy pro max by questioning India over BRICS
As usual Rahul-Gram sorry Instagram suppressed the video
Koi sharm laaj hai ? BRICS is not @narendramodi or BJP private program- it’s putting Bharat First
Do i have to Rahul ki…
— Shehzad Jai Hind (@Shehzad_Ind) September 11, 2026
इसी बात को लेकर उन्होंने इंस्टाग्राम के लिए “राहुल ग्राम” नाम का इस्तेमाल किया। पूनावाला ने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या सोशल मीडिया पर अपनी बात को आगे बढ़ाने के लिए अब उन्हें राहुल गांधी की जय-जयकार करनी पड़ेगी। हालांकि, वीडियो को प्लेटफॉर्म द्वारा जानबूझकर दबाए जाने के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चिदंबरम के बयान से शुरू हुई बहस
दरअसल, विवाद की शुरुआत पी। चिदंबरम की BRICS को लेकर की गई टिप्पणी से हुई। एक इंटरव्यू में चिदंबरम ने कहा था कि भारत BRICS के अलावा SCO, G20 और QUAD जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है। उनका कहना था कि पिछले दो-तीन सम्मेलनों के बाद भी भारत को इनसे कोई स्पष्ट और प्रत्यक्ष लाभ मिलता दिखाई नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि BRICS सम्मेलन में कितने देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो रहे हैं। चिदंबरम की टिप्पणी के जवाब में पूनावाला ने यूपीए सरकार के समय हुए BRICS सम्मेलन की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि 2012-13 के दौरान दिल्ली में BRICS सम्मेलन आयोजित हुआ था और उस समय कांग्रेस सरकार ने इसकी अहमियत को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया था।
पूनावाला का सवाल है कि अगर उस समय यह मंच भारत के लिए उपयोगी था, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में होने वाले BRICS सम्मेलन को लेकर सवाल क्यों खड़े किए जा रहे हैं।
घरेलू राजनीति का अखाड़ा
BRICS पर छिड़ी यह बहस अब केवल किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की उपयोगिता तक सीमित नहीं रही। इसके जरिए भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे की विदेश नीति और राजनीतिक दृष्टिकोण पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा इसे भारत के वैश्विक प्रभाव और राष्ट्रीय हित से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस सम्मेलन से मिलने वाले ठोस परिणामों को लेकर सवाल कर रही है। ऐसे में BRICS का मंच एक बार फिर देश की घरेलू राजनीति में बयानबाजी का नया मैदान बन गया है।
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