Bareilly Urs-e-Razvi : बरेली में उर्स-ए-रजवी के दूसरे दिन शुक्रवार को इस्लामिया मैदान में तहफ्फुज मजहब ओ मसलक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को सियासी मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि इसे मजहबी जंग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ईरान को इस्लाम और मुसलमानों की इतनी ही चिंता होती तो वह पहले मस्जिद-ए-अक्सा, फलस्तीन और अफगानिस्तान के लिए लड़ता।
मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि देश और समाज को मजबूत बनाने के लिए मुसलमानों को उच्च शिक्षा हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज में बेहतर स्कूल स्थापित करने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना समाज के विकास के लिए जरूरी है।
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मदरसों को आतंकवाद से जोड़कर बदनाम किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे लोगों की शिक्षा का भी मदरसों से जुड़ाव रहा है। उन्होंने मुसलमानों से ऐसे धरना-प्रदर्शनों से दूर रहने की अपील की, जिनका कोई स्पष्ट नेतृत्व न हो।
मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि कई मुस्लिम युवा खुद को निर्दोष बताते हुए भी लंबे समय से जेलों में बंद हैं। उन्होंने समाज के लोगों से संयम बरतने और बिना नेतृत्व वाले आंदोलनों से दूरी बनाए रखने की बात कही।
बेटियों की तालीम पर जोर
कॉन्फ्रेंस में कारी यूसुफ रजा संभली ने मुस्लिम परिवारों से बेटियों की शिक्षा और परवरिश पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बेटियों को शरई दायरे में रहते हुए अच्छी तालीम और तरबियत दी जानी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से बेटियों को मोबाइल फोन के बजाय कानून-ए-शरीयत जैसी धार्मिक किताबों से जोड़ने की अपील की, ताकि वे धार्मिक और नैतिक मूल्यों को समझ सकें।
तहफ्फुज मजहब ओ मसलक कॉन्फ्रेंस दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान की सरपरस्ती में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने की, जबकि सैयद आसिफ मियां की देखरेख में कार्यक्रम संपन्न हुआ। कॉन्फ्रेंस में धार्मिक, सामाजिक और शैक्षिक मुद्दों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
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