Delhi E-Rickshaw License Rule : दिल्ली में ई-रिक्शा चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया नए नियमों के कारण प्रभावित होती नजर आ रही है। सरकार ने ई-रिक्शा चालकों के लिए लाइसेंस जारी करने से पहले 10 दिन का अनिवार्य प्रशिक्षण लेना जरूरी कर दिया है। हालांकि, प्रशिक्षण व्यवस्था पूरी तरह तैयार न होने के कारण बड़ी संख्या में आवेदकों को इंतजार करना पड़ सकता है।
परिवहन विभाग के निर्देश के अनुसार आवेदकों को मान्यता प्राप्त ड्राइविंग स्कूलों या इस क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं से प्रशिक्षण लेना होगा। लेकिन मौजूदा समय में अधिकांश ड्राइविंग स्कूल ई-रिक्शा संचालन का प्रशिक्षण नहीं दे रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण प्रशिक्षण के लिए आवश्यक ई-रिक्शा वाहनों की उपलब्धता नहीं होना बताया जा रहा है।
Delhi E-Rickshaw License Rule
राजधानी में लगभग 30 ड्राइविंग स्कूल विभिन्न श्रेणियों के वाहन चलाने का प्रशिक्षण देते हैं। इनमें कई बड़े निजी संस्थान भी शामिल हैं। अब सरकार ने इन्हें ई-रिक्शा प्रशिक्षण देने की अनुमति देने का फैसला किया है, लेकिन इसके लिए पहले परिवहन विभाग से अलग मंजूरी लेनी होगी। मंजूरी मिलने के बाद ही ये संस्थान आधिकारिक तौर पर प्रशिक्षण शुरू कर सकेंगे। समस्या की जड़ सरकार का वह आदेश माना जा रहा है, जिसमें ई-रिक्शा का पंजीकरण केवल किसी व्यक्ति के नाम पर ही मान्य रखा गया है। स्कूल, कंपनियां या संस्थाएं अपने नाम पर ई-रिक्शा रजिस्टर नहीं करा सकतीं। ऐसे में प्रशिक्षण संस्थानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना वाहन के वे प्रशिक्षण कैसे शुरू करें।
सरकार को भेजी शिकायत
कई ड्राइविंग स्कूल संचालकों का कहना है कि प्रशिक्षण की जिम्मेदारी तो दे दी गई, लेकिन उसके लिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर कुछ संस्थानों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र भेजकर नियमों में व्यावहारिक समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक स्कूलों को प्रशिक्षण के लिए ई-रिक्शा उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक नियम का पालन करना मुश्किल रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार जल्द कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करती, तो नए ई-रिक्शा चालकों के लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। इसका असर न केवल रोजगार की तलाश कर रहे लोगों पर पड़ेगा, बल्कि शहर में ई-रिक्शा संचालन से जुड़े नए आवेदकों को भी अतिरिक्त इंतजार करना पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है।
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