Amul : भारत में डेयरी सेक्टर की बात होती है तो सबसे पहले अमूल का नाम आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश की सबसे बड़ी डेयरी संस्था कौन-सी है? बहुत कम लोग जानते हैं कि अमूल को सबसे ज्यादा दूध सप्लाई करने वाली एक और बड़ी सहकारी संस्था है, जो एशिया की सबसे बड़ी डेयरी मानी जाती है। भारत की सबसे बड़ी डेयरी बनास डेयरी है, जिसे बनासकांठा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड के नाम से भी जाना जाता है।
बता दें कि इसका मुख्यालय गुजरात के पालनपुर में स्थित है। यह संस्था गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) का अहम हिस्सा है, जो अमूल ब्रांड के तहत काम करता है।
Amul से भी बड़ा है ये डेयरी नेटवर्क!
बनास डेयरी की क्षमता बेहद बड़ी है। यह संस्था हर दिन 80 लाख लीटर से ज्यादा दूध एकत्र करती है। खास बात यह है कि सर्दियों के मौसम में यह आंकड़ा 1 करोड़ लीटर तक पहुंच जाता है। इसका सालाना कारोबार 24,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बताया जाता है, जो इसे देश की सबसे बड़ी डेयरी संस्था बनाता है। बनास डेयरी के उत्पादों की मार्केटिंग गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ के जरिए होती है, जो अमूल ब्रांड को संभालता है। दूध के अलावा यहां मक्खन, आइसक्रीम, खोया, स्नैक्स और चॉकलेट जैसे कई प्रोडक्ट बनाए जाते हैं, जिन्हें ‘अमूल’ नाम से बाजार में बेचा जाता है।
किसानों के सहयोग से शुरुआत
इस डेयरी की शुरुआत किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए की गई थी। इसके पीछे गालबाभाई नानजीभाई पटेल का बड़ा योगदान रहा, जिन्हें ‘गालबा काका’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने किसानों को एक मंच पर लाकर दूध उत्पादन को संगठित रूप देने का काम किया। बनास डेयरी की शुरुआत 1960 में केवल दो तालुकों के आठ गांवों से हुई थी। बाद में 1969 में इसे औपचारिक रूप से स्थापित किया गया। यह स्थापना ‘ऑपरेशन फ्लड’ और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से हुई, जिसने भारत में डेयरी क्रांति को नई दिशा दी।
देशभर में फैला नेटवर्क
आज बनास डेयरी सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं है। इसने देश के कई राज्यों में अपनी मजबूत उपस्थिति बना ली है। अलग-अलग राज्यों में इसकी पहुंच बढ़ती जा रही है, जिससे लाखों किसानों को रोजगार और आय का साधन मिल रहा है। इस डेयरी के साथ 20 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं। करीब 1.8 लाख किसान परिवार 1,200 से ज्यादा गांव स्तर की समितियों के जरिए इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। यह मॉडल किसानों को सीधे फायदा पहुंचाने के लिए जाना जाता है।
बनास डेयरी सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि किसानों की ताकत का प्रतीक बन चुकी है। इसने दिखाया है कि संगठित प्रयास और सही दिशा में काम करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है। यही वजह है कि आज यह भारत ही नहीं, एशिया की सबसे बड़ी डेयरी संस्था बन चुकी है।
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