Kashmir : कश्मीर घाटी एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजन की गवाह बनने जा रही है। अमरनाथ यात्रा के दौरान इस साल कुंभ मेले का आयोजन भी किया जाएगा। Swami Kalikanand Saraswati ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि उनका मठ बांडीपोरा जिले के शादीपोरा में इस परंपरा को फिर से जीवित करने जा रहा है। लंबे समय बाद घाटी में इस तरह का आयोजन होना अपने आप में खास माना जा रहा है।
इस कुंभ मेले का आयोजन 15 जुलाई से 24 जुलाई तक किया जाएगा। आयोजकों के मुताबिक, इस दौरान तीन से चार लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां आएंगे। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बड़ा मंच बनने वाला है।
Kashmir में लगेगा कुंभ मेला
इससे पहले साल 2016 में भी घाटी में एक दिवसीय कुंभ मेले का आयोजन किया गया था। उस समय करीब 35 हजार श्रद्धालु शामिल हुए थे। हालात पूरी तरह अनुकूल नहीं होने की वजह से यह आयोजन सीमित ही रह गया था। अब परिस्थितियां बेहतर होने के चलते इसे बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की गई है। इतिहास पर नजर डालें तो कश्मीर में 1941 तक कुंभ मेला नियमित रूप से आयोजित होता था। इसके बाद बदलते हालात और बाहरी हस्तक्षेप के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो गई। अब करीब 85 साल बाद इसे फिर से शुरू करने की कोशिश हो रही है, जिसे एक बड़े सांस्कृतिक पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है।
सर्वधर्म सम्मेलन भी होगा आकर्षण
इस मेले की खास बात यह होगी कि इसमें सर्वधर्म सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा। अलग-अलग धर्मों के लोग इसमें शामिल होकर आपसी संवाद और भाईचारे का संदेश देंगे। आयोजकों का मानना है कि इस मंच के जरिए कश्मीर से एकता और सौहार्द का मजबूत संदेश दिया जा सकता है। स्वामी कालिकानंद ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश देने का भी माध्यम है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में सभी समुदायों के बीच भाईचारा मजबूत होना चाहिए। जो दर्द और संघर्ष यहां के लोगों ने देखा है, उसे पीछे छोड़कर अब एकजुटता की मिसाल पेश करने का समय है।
देश-विदेश तक जाएगा संदेश
आयोजकों का उद्देश्य इस कुंभ मेले के जरिए देश और दुनिया को यह दिखाना है कि कश्मीर की पहचान सिर्फ संघर्ष नहीं, बल्कि संस्कृति और सहअस्तित्व भी है। आने वाले दिनों में यह आयोजन घाटी की नई तस्वीर पेश कर सकता है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।
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