Raj Babbar : करीब 30 साल पुराने चुनावी हिंसा मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए राज बब्बर को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए उनकी अपील मंजूर कर ली। इस फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में राज बब्बर को बड़ी राहत मिली है। सुनवाई के दौरान राज बब्बर खुद अदालत में मौजूद रहे। अदालत ने 2022 में सुनाई गई दो साल की सजा और 6,500 रुपये के जुर्माने को पूरी तरह रद्द कर दिया। इससे पहले निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत उन्हें दोषी ठहराया था, लेकिन अब अपीलीय अदालत ने उस फैसले को पलट दिया है।
यह मामला 2 मई 1996 का है, जब लोकसभा चुनाव के दौरान वजीरगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि उस समय समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रहे राज बब्बर अपने समर्थकों के साथ एक मतदान केंद्र पर पहुंचे थे और फर्जी मतदान का आरोप लगाते हुए वहां मौजूद कर्मचारियों से मारपीट की थी। इस घटना में चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को चोटें आई थीं।
Raj Babbar को राहत
घटना के बाद पुलिस ने जांच पूरी कर 23 सितंबर 1996 को आरोपपत्र दाखिल किया था। मामले में सह-आरोपी अरविंद यादव की मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। साल 2020 में राज बब्बर पर औपचारिक रूप से आरोप तय हुए और गवाहों के आधार पर 2022 में मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राज बब्बर ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपीलीय अदालत ने पूरे मामले की दोबारा सुनवाई की और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद राज बब्बर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है।
राज बब्बर की प्रतिक्रिया
अदालत से राहत मिलने के बाद राज बब्बर ने कहा कि उस समय के राजनीतिक माहौल में उन पर गलत आरोप लगाए गए थे, जिनका उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करना था। उन्होंने कहा कि वह हमेशा संविधान और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं और जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
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