SAP : जर्मनी की सॉफ्टवेयर कंपनी SAP की भारतीय इकाई और नायरा एनर्जी के बीच विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। कंपनी द्वारा महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर सेवाएं बंद किए जाने के बाद नायरा एनर्जी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में अदालत अगले सप्ताह सुनवाई करने वाली है, जिससे दोनों पक्षों की दलीलें एक बार फिर सामने आएंगी।
मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में SAP इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने नायरा एनर्जी को दी जाने वाली सॉफ्टवेयर सेवाएं अचानक रोक दी थीं। कंपनी ने इसके पीछे यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का हवाला दिया था।
SAP बनाम नायरा एनर्जी विवाद
दरअसल, रूस के साथ कारोबारी संबंधों को लेकर यूरोपीय संघ ने नायरा एनर्जी पर कुछ पाबंदियां लगाई थीं, जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ। जब यह मामला अदालत में पहुंचा था, तब शुरुआती सुनवाई के दौरान तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया था। हालांकि, अब अदालत ने इस याचिका पर विस्तृत सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की है। इस सुनवाई में यह तय होगा कि सॉफ्टवेयर सेवाएं रोकने का फैसला नियमों के अनुरूप था या नहीं।
ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा
अदालत में नायरा एनर्जी की ओर से यह दलील दी गई है कि उसका समझौता सीधे SAP इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ है, जो भारत में पंजीकृत कंपनी है। इसलिए उस पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध सीधे लागू नहीं होते। कंपनी का कहना है कि सेवाएं बंद होने से उसके संचालन पर गंभीर असर पड़ सकता है और इससे देश की ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि नायरा भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
दूसरी ओर SAP इंडिया का कहना है कि वह अपनी जर्मनी स्थित मूल कंपनी के सहयोग के बिना इस तरह की तकनीकी सेवाएं जारी नहीं रख सकती। कंपनी का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और प्रतिबंधों का पालन करना उनके लिए जरूरी है। ऐसे में प्रतिबंधों के चलते सेवाओं को जारी रखना संभव नहीं था।
18 साल से सॉफ्टवेयर पर निर्भर है कंपनी
नायरा एनर्जी ने अपनी याचिका में कहा है कि पिछले करीब 18 वर्षों से कंपनी अपने परिचालन के लिए SAP के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही है। यह सिस्टम उसके व्यापार और प्रबंधन से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। ऐसे में अचानक सेवाएं बंद करने से संचालन में बड़ी दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।
नायरा एनर्जी का आरोप है कि सॉफ्टवेयर सेवाओं को अचानक और एकतरफा तरीके से रोकना गलत है। कंपनी का कहना है कि इससे भारतीय कंपनियों के संचालन को विदेशी संस्थाओं के फैसलों पर निर्भर रहने का खतरा बढ़ जाता है। अब सभी की नजर आने वाली सुनवाई पर टिकी है, जहां अदालत इस पूरे विवाद पर अपना रुख साफ करेगी।
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