Mahashivratri 2026 : हिंदू पंचांग के मुताबिक 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी और इसके ठीक दो दिन बाद 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण लगेगा। इतने कम अंतराल में शिवरात्रि और ग्रहण का पड़ना ज्योतिषीय दृष्टि से असाधारण माना जा रहा है। आस्था रखने वाले लोग इसे ऊर्जा परिवर्तन का समय मान रहे हैं। मान्यता है कि ऐसे संयोग में आध्यात्मिक साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
शिवरात्रि की रात जब भक्त निशिता काल में भगवान शिव की आराधना करेंगे, उसी समय से ग्रहण का प्रभाव सूक्ष्म रूप से शुरू हो सकता है। भले ही ग्रहण 17 फरवरी को दिखाई देगा, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उसका ऊर्जात्मक असर पहले से सक्रिय हो जाता है। इसलिए इस बार की शिवरात्रि पर मानसिक एकाग्रता और शुद्ध संकल्प को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
Mahashivratri के 48 घंटे बाद सूर्य ग्रहण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से पहले का समय आत्ममंथन और नकारात्मकता त्यागने का अवसर होता है। ऐसे में शिव मंत्रों का जाप और रुद्राभिषेक विशेष फलदायी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान की गई प्रार्थना आने वाले समय में मानसिक स्थिरता देती है और ग्रहण के संभावित दुष्प्रभावों से बचाव का माध्यम बनती है। कई मंदिरों में विशेष पूजन और रात्रि जागरण की तैयारियां चल रही हैं।
इन बातों का रखें खास ध्यान
शिवरात्रि से ग्रहण समाप्ति तक व्रत का पारण विधि-विधान से करने की सलाह दी जा रही है। तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखें और क्रोध या नकारात्मक विचारों से बचें। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप मन को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है। पूजा के दौरान ईर्ष्या या द्वेष की भावना न रखें, क्योंकि मान्यता है कि ग्रहण के समय मानसिक स्थिति का प्रभाव अधिक गहरा होता है। इस अवधि में किया गया दान-पुण्य भी विशेष फल देने वाला माना जाता है।
भक्ति से बनेगा सुरक्षा कवच
शास्त्रों में उल्लेख है कि सच्ची श्रद्धा से की गई शिव भक्ति ग्रह दोषों को शांत करने में सहायक होती है। जो श्रद्धालु शिवरात्रि की रात जागरण करते हैं और शिव स्तुति का पाठ करते हैं, वे स्वयं को आध्यात्मिक रूप से मजबूत महसूस करते हैं। ग्रहण से पहले के ये 48 घंटे आत्मशुद्धि और संकल्प को दृढ़ करने का अवसर माने जा रहे हैं। आस्था है कि विधिपूर्वक की गई पूजा जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का मार्ग प्रशस्त करती है।
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