Mahashivratri Special : उत्तराखंड की ऊंची वादियों में, तुंगनाथ घाटी के बीच स्थित तुंगेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धा और प्रकृति का अद्भुत संगम पेश करता है। बर्फ से ढकी चोटियों और हरे-भरे बुग्यालों से घिरा यह स्थल धार्मिक ही नहीं, आध्यात्मिक ऊर्जा का भी केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव ने साधकों को साक्षात दर्शन दिए थे। यही कारण है कि महाशिवरात्रि पर क्षेत्र के गांवों से लेकर दूरदराज के श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए उमड़ पड़ते हैं।
ऊखीमठ ब्लॉक की परकंडी ग्राम पंचायत के त्यूंग गांव में स्थित यह मंदिर करीब 16 गांवों की आस्था का केंद्र है। यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग को आदि शंकराचार्य के कालखंड से भी पूर्व का माना जाता है।
Mahashivratri Special: तुंगनाथ घाटी में बसा तुंगेश्वर महादेव
स्थानीय लोगों के अनुसार, समय-समय पर यहां खुदाई में छोटी बावड़ियां और प्राचीन अवशेष मिलते रहे हैं, जो इसकी ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं। जनश्रुति है कि वर्षों पहले एक दक्षिण भारतीय संत यहां तपस्या करते थे। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद संत परंपरा ने ही मंदिर की सेवा संभाली, जो आज भी जारी है।
वर्ष 2004 में पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे भव्य रूप दिया गया। दक्षिण भारतीय वास्तुकला में बने इस मंदिर के गर्भगृह में माता पार्वती, गणेश और पंचमुखी हनुमान विराजमान हैं। सभामंडप में मां दुर्गा, हनुमान और नंदी की मूर्तियां श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती हैं। चारों दिशाओं में विभिन्न देवताओं की स्थापना मंदिर को एक दिव्य परिसर का रूप देती है। मुख्य द्वार पर शिव परिवार, यक्ष-गंधर्व, नारद और नटराज की प्रतिमाएं मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाती हैं।
महाशिवरात्रि पर उमड़ता है जनसैलाब
मंदिर के महंत 108 स्वामी भवानंद पुरी के अनुसार, सावन और माघ जैसे महीनों में यहां विशेष अनुष्ठान होते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि का उत्सव सबसे खास माना जाता है। इस दिन भोर से ही भक्त जल और बेलपत्र लेकर कतार में खड़े दिखाई देते हैं। पूरी घाटी ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठती है। कई श्रद्धालु रात्रि जागरण कर भोलेनाथ की आराधना करते हैं।
कैसे पहुंचे तुंगेश्वर धाम
मंदिर तक पहुंचना भी एक सुंदर अनुभव है। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर करीब 30 किलोमीटर और भीरी-परकंडी लिंक मार्ग पर लगभग साढ़े तीन किलोमीटर का सफर तय कर त्यूंग गांव पहुंचा जा सकता है। वहां से करीब 100 मीटर की पैदल दूरी तय करते ही तुंगेश्वर महादेव के दर्शन होते हैं। प्रकृति और भक्ति का यह संगम हर यात्री को अलग ही सुकून दे जाता है।
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