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Bangladesh में सत्ता परिवर्तन भारत के लिए सहयोग का नया अवसर, 5 प्वाइंट में समझें

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Bangladesh News : बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। जमात-ए-इस्लामी बहुमत से दूर रही, जबकि आवामी लीग इस चुनाव में शामिल नहीं हुई। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान नई सरकार के प्रधानमंत्री होंगे। यह चुनाव पूरी तरह नई राजनीतिक व्यवस्था लेकर आया है और क्षेत्रीय भू-राजनीति पर भी इसका असर दिख सकता है। नई सरकार के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग की संभावनाएं बनी रहती हैं।

भारत ने तारिक रहमान को बधाई दी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिवादी और समावेशी बांग्लादेश के साथ हमेशा खड़ा रहेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम भारत के लिए प्रतिकूल नहीं, बल्कि संतुलित अवसर प्रदान कर सकता है।

Bangladesh में सत्ता परिवर्तन

बीएनपी सरकार में भारत के लिए सुरक्षा संबंधी दबाव जमात-ए-इस्लामी की तुलना में कम होगा। जमात का वैचारिक झुकाव कट्टरपंथ और पाकिस्तान समर्थक विचारों की ओर रहा है। बहुमत से दूर रहना भारत की पूर्वोत्तर सीमाओं पर अस्थिरता और सीमा पार घुसपैठ जैसी चिंताओं को कम करता है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था दबाव में है। विदेशी मुद्रा में गिरावट, मुद्रास्फीति और निर्यात दबाव के कारण नई सरकार की प्राथमिकता आर्थिक सुधार होगी। भारत के साथ ऊर्जा, रेल, सड़क और बंदरगाह परियोजनाओं को जारी रखना बीएनपी के लिए व्यावहारिक आवश्यकता होगी। भारतीय निवेश और व्यापार सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी रहेगा।

रणनीतिक स्थिरता

नई दिल्ली ने पिछले महीनों में बीएनपी के साथ संवाद बनाए रखा। खालिदा जिया की मौत के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ढाका गए थे। कूटनीतिक संपर्कों की यह तैयारी नई सरकार के भारत विरोधी रुख को चुनौती देती है। भारत-बांग्लादेश संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संरचनात्मक रूप से जुड़े हैं। पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय परियोजनाएं दोनों देशों के आर्थिक हित में हैं। वैश्विक भू-राजनीति में स्थिरता और भरोसेमंद साझेदार की जरूरत के बीच भारत रणनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण सहयोगी बना रहेगा।

चुनाव परिणाम भारत के लिए पूर्ण संतोष का कारण नहीं, लेकिन गंभीर चिंता का संकेत भी नहीं हैं। जमात बहुमत से दूर है और बीएनपी का रुख व्यावहारिक प्रतीत होता है। भारत को सतर्कता और धैर्य के साथ बहु-स्तरीय कूटनीति अपनानी होगी, ताकि नई दिल्ली और ढाका के बीच ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का नया अध्याय सफल हो।

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