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Uttarakhand: नीती घाटी में आस्था और पर्यटन का संगम, टिम्मरसैंण बर्फानी धाम के कायाकल्प पर 26.85 करोड़

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Uttarakhand : चमोली जिले की नीती घाटी में बसे अंतिम गांव नीती के पास टिम्मरसैंण महादेव की गुफा वर्षों से आस्था का केंद्र रही है। हर साल जनवरी से मार्च के बीच यहां प्राकृतिक रूप से बर्फ से शिवलिंग का स्वरूप उभरता है, जिसे श्रद्धालु बाबा बर्फानी के रूप में पूजते हैं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और कठोर मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था यहां तक उन्हें खींच ही लाती है। अब टिम्मरसैंण गुफा क्षेत्र जल्द ही नए कलेवर में नजर आएगा।

केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत यहां बुनियादी सुविधाओं और सौंदर्यीकरण का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए पर्यटन विभाग को 26 करोड़ 85 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। इस परियोजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।

Uttarakhand: नीती घाटी

टिम्मरसैंण गुफा तक पहुंचने वाला करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा पैदल रास्ता अब पहले जैसा कठिन नहीं रहेगा। बर्फबारी के चलते फिसलन भरे इस मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए रेलिंग लगाई जा रही है। साथ ही प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखते हुए रास्ते में नक्काशीदार पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगम और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल सके।

सौंदर्यीकरण से निखरेगा

गुफा परिसर के आसपास भी व्यापक सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। अत्यधिक बर्फबारी न होने का लाभ उठाते हुए पर्यटन विभाग ने समय से पहले काम शुरू कर दिया है। पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता के बीच धार्मिक वातावरण को और आकर्षक बनाने की योजना है, जिससे यह स्थल सिर्फ आस्था ही नहीं बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी खास बने। पिछले कुछ वर्षों में टिम्मरसैंण बर्फानी की प्रसिद्धि तेजी से बढ़ी है। अब यह स्थल सिर्फ स्थानीय श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। औली जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर आने वाले सैलानी भी टिम्मरसैंण गुफा को अपने यात्रा कार्यक्रम में शामिल कर रहे हैं।

2027 तक पूरा होगा विकास

जिला पर्यटन विभाग के अनुसार टिम्मरसैंण क्षेत्र में चल रहे सभी अवस्थापना विकास कार्यों को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उम्मीद है कि इसके बाद यह धार्मिक स्थल सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास, रोजगार और पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरेगा, जहां आस्था और प्रकृति दोनों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

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