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Kanpur लैंबॉर्गिनी कांड: वीआईपी सड़क से थाने तक, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

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Kanpur News : कानपुर की वीआईपी रोड पर सुपर लग्जरी लैंबॉर्गिनी कार से हुए हादसे ने पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। तंबाकू कारोबारी के बेटे से जुड़े इस मामले में शुरुआती स्तर पर पुलिस की सक्रियता कम और ढिलाई ज्यादा नजर आई। हादसे के बाद जिस तरह से केस को हैंडल किया गया, उसने आम लोगों के बीच नाराजगी बढ़ा दी। सोमवार को थाने में खड़ी लैंबॉर्गिनी को कवर से ढंकने का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पुलिस की जमकर किरकिरी होने लगी।

लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर एक हादसे में शामिल गाड़ी को इस तरह “सुरक्षित” क्यों रखा जा रहा है। इंटरनेट मीडिया पर बढ़ते दबाव के बाद पुलिस महकमे को कार्रवाई करनी पड़ी।

Kanpur लैंबॉर्गिनी कांड

मामला तूल पकड़ता देख पुलिस आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया। यह कदम साफ तौर पर पुलिस की छवि को बचाने की कोशिश माना जा रहा है। हालांकि, सवाल अब भी कायम है कि अगर सोशल मीडिया पर हंगामा न होता तो क्या यह कार्रवाई होती? हादसे के बाद घायल की तहरीर पर पहले सिर्फ कार नंबर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में जांच आगे बढ़ने पर तंबाकू कारोबारी केके मिश्र के बेटे शिवम का नाम एफआईआर में जोड़ा गया। इस देरी ने पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रईसी और शौक की लंबी फेहरिस्त

शिवम अपनी आलीशान जिंदगी और महंगे शौकों के लिए पहले से ही चर्चाओं में रहे हैं। उनके पास रोल्स रॉयस, लैंबॉर्गिनी, फेरारी, मैकलेरन और पोर्श जैसी लग्जरी कारों का कलेक्शन बताया जाता है। इसके अलावा करोड़ों रुपये की ब्रांडेड और हीरे जड़ी घड़ियां भी उनकी पहचान का हिस्सा हैं। रविवार को मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपित के आर्यनगर स्थित आवास पर पहुंची। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो पुलिस को वापस लौटना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

जांच के आदेश

डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने सफाई दी कि पुलिस आरोपित पक्ष को नोटिस तामील कराने गई थी। दरवाजा न खुलने के मामले की जांच कराई जाएगी। फिलहाल यह पूरा प्रकरण पुलिस की कार्यशैली और रसूखदारों के प्रति रवैये को लेकर बहस का विषय बना हुआ है।

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