Rafale : फरवरी के तीसरे सप्ताह में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले देश की रक्षा तैयारियों को लेकर बड़ा कदम उठने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय भारतीय वायु सेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़े करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर उच्च स्तर पर चर्चा की तैयारी में है। माना जा रहा है कि यह मंथन आने वाले दिनों में होने वाली अहम बैठकों में केंद्र में रहेगा।
भारतीय वायु सेना की इस बहुप्रतीक्षित जरूरत को पिछले महीने रक्षा खरीद बोर्ड से शुरुआती स्वीकृति मिल चुकी है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, अब यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय की शीर्ष समिति के सामने रखा जाएगा, जहां तकनीकी, रणनीतिक और वित्तीय पहलुओं पर गहन विचार होगा।
Rafale लड़ाकू विमानों की खरीद
इस प्रक्रिया को तेज करने की एक वजह बदलता क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य भी माना जा रहा है। वर्तमान समय में भारतीय वायु सेना लगभग 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन के भरोसे अपनी जिम्मेदारियां निभा रही है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। यह अंतर लंबे समय से वायु सेना की परिचालन क्षमता पर दबाव बना रहा है। सीमा पर बढ़ती चुनौतियों और पड़ोसी देशों की सैन्य गतिविधियों के बीच यह कमी अब और गंभीर रूप लेती जा रही है।
बढ़ती जरूरत
पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकी और क्षेत्रीय संतुलन में हो रहे बदलावों ने खतरे की धारणा को और गहरा कर दिया है। ऐसे माहौल में 4.5 पीढ़ी से आगे के मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट की जरूरत को टाला नहीं जा सकता। राफेल सौदे को इसी दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इस प्रस्ताव की एक बड़ी खासियत यह है कि 114 में से करीब 80 फीसदी राफेल विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। योजना के अनुसार, वायु सेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान मिलेंगे। इनका निर्माण फ्रांसीसी कंपनी डासल्ट और भारतीय निजी कंपनियों की साझेदारी से किया जाएगा, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।
राफेल बेड़े की ताकत होगी दोगुनी
सौदा पूरा होने के बाद भारतीय वायु सेना और नौसेना के पास मिलाकर राफेल विमानों की संख्या करीब 150 तक पहुंच जाएगी। इसमें नौसेना के वे 26 विमान भी शामिल होंगे, जिन्हें विमानवाहक पोत पर तैनात किया जा चुका है। यह संख्या भारत की हवाई शक्ति को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के 18 फरवरी को दिल्ली में होने वाले एआई शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। ऐसे में उससे पहले राफेल सौदे पर होने वाली चर्चा को रणनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। साफ है कि आने वाले हफ्ते भारतीय वायु सेना के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
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