Uttarakhand : आखिरकार जनता की गाढ़ी कमाई लेकर फरार चल रहे ठगों की कहानी का एक अहम अध्याय खत्म हो गया। दरअसल, नैनीताल पुलिस ने तीन साल से छिपे बैठे करोड़ों की धोखाधड़ी के एक मुख्य आरोपी को लालकुआं क्षेत्र से दबोच लिया। यह गिरफ्तारी उन सैकड़ों निवेशकों के लिए राहत की खबर है, जिनकी मेहनत की कमाई एक झूठे सपने में डूब गई थी।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने लोगों को अधिक ब्याज और पूरी गारंटी का ऐसा सपना दिखाया, जिसे देखकर आम आदमी ने बिना ज्यादा सोचे-समझे निवेश कर दिया। खुद को सहकारी संस्था बताने वाले इस गिरोह ने भरोसे की आड़ में लोगों की जेबें खाली कर दीं। यही भरोसा बाद में उनके लिए सबसे बड़ा धोखा साबित हुआ।
Uttarakhand का मामला
आरोपियों ने वर्ष 2017 में “देवभूमि बहुद्देशीय स्वावलंबी सहकारी समिति” के नाम से एक फर्जी संस्था खड़ी की। कागजों पर सब कुछ वैध दिखाया गया, लेकिन हकीकत में यह संस्था सिर्फ ठगी का जरिया थी। रामनगर, हल्द्वानी और आसपास के इलाकों से करीब 300 लोगों को जाल में फंसाकर लगभग 6 करोड़ 80 लाख रुपये जमा करा लिए गए। जैसे ही भारी रकम इकट्ठा हो गई, संस्था के संचालक अचानक गायब हो गए। निवेशकों को न तो ब्याज मिला, न मूलधन। कई लोगों ने थाने के चक्कर लगाए, तब जाकर मामला दर्ज हुआ। कोतवाली रामनगर में मुकदमा संख्या 246/23 के तहत धारा 409 में केस दर्ज किया गया, लेकिन आरोपी लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे।
तकनीक और टीमवर्क
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी के निर्देश पर गठित टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और लगातार मिल रहे सुरागों के आधार पर कार्रवाई तेज की। आखिरकार पुलिस ने लालकुआं क्षेत्र में दबिश देकर दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में हेमचंद पंत निवासी हरिपुर नायक, नैनीताल और विकास दुर्गापाल निवासी डहरिया, हल्द्वानी शामिल हैं।
साथ ही जनता से अपील की गई है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच जरूर करें। थोड़े से लालच में फंसकर सालों की मेहनत गंवाना सबसे बड़ा नुकसान है।
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