Subsidiary IPO : आने वाले महीनों में शेयर बाजार में एक बार फिर हलचल तेज होने वाली है। कई बड़ी और जानी-मानी कंपनियां अपनी सब्सिडियरी यूनिट्स को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। टेलीकॉम, फाइनेंस, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर से जुड़ी कंपनियां 2026 में आईपीओ लाने की कतार में हैं। खास बात यह है कि इन प्रस्तावित आईपीओ में मौजूदा निवेशकों को एक खास सुविधा मिलने की संभावना है, जिसे शेयरहोल्डर कोटा कहा जाता है।
जब कोई मजबूत और स्थापित कंपनी अपनी सहायक इकाई को लिस्ट कराती है, तो निवेशकों का भरोसा पहले से ज्यादा होता है। पेरेंट कंपनी की ब्रांड वैल्यू, बैलेंस शीट और ट्रैक रिकॉर्ड सब्सिडियरी के आईपीओ को आकर्षक बनाते हैं। यही वजह है कि ऐसे आईपीओ में रिटेल से लेकर बड़े निवेशकों तक की दिलचस्पी देखने को मिलती है।
Subsidiary IPO की तैयारी में दिग्गज कंपनियां
आईपीओ में शेयरहोल्डर कोटा एक ऐसा रिजर्वेशन होता है, जो खासतौर पर पेरेंट कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों के लिए रखा जाता है। अगर आपके पास पहले से उस कंपनी के शेयर हैं, जिसकी सब्सिडियरी बाजार में उतर रही है, तो आपको एक अलग कैटेगरी में आवेदन करने का मौका मिलता है। यह कोटा कंपनी अपने पुराने और वफादार निवेशकों को प्राथमिकता देने के लिए तय करती है।
शेयरहोल्डर कोटा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें भीड़ आमतौर पर रिटेल कैटेगरी से कम होती है। कम प्रतिस्पर्धा होने की वजह से शेयर मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। कई मामलों में निवेशक एक ही पैन कार्ड से रिटेल और शेयरहोल्डर, दोनों कैटेगरी में आवेदन कर सकते हैं, जिससे अलॉटमेंट के चांस और मजबूत हो जाते हैं।
देखें लिस्ट
| कंपनी | सेक्टर | पैरेंट कंपनी | शेयरहोल्डर कोटा |
|---|---|---|---|
| जियो प्लेटफॉर्म्स | दूरसंचार और डिजिटल | रिलायंस इंडस्ट्रीज | हाँ |
| हीरो फिनकॉर्प | एनबीएफसी | हीरो मोटोकॉर्प | हाँ |
| एसबीआई म्यूचुअल फंड | परिसंपत्ति प्रबंधन | भारतीय स्टेट बैंक | हाँ |
| एनएलसी इंडिया रिन्यूएबल्स | नवीकरणीय ऊर्जा | एनएलसी इंडिया | हाँ |
| भारतीय गैस विनिमय | ऊर्जा विनिमय | आईईएक्स | हाँ |
| ईएएए इंडिया विकल्प | वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन | एडेलवाइस फाइनेंशियल | संभावित |
| महानदी कोयला क्षेत्र | कोयला खनन | कोल इंडिया | हाँ |
| दक्षिण पूर्वी कोयला क्षेत्र | कोयला खनन | कोल इंडिया | हाँ |
| सीएमपीडी | खनन सेवाएं | कोल इंडिया | हाँ |
| बेलस्टार माइक्रोफाइनेंस | माइक्रोफाइनांस | मुथूट वित्त | हाँ |
निवेशकों के लिए दोहरा फायदा
इस कोटे का फायदा सिर्फ अलॉटमेंट तक सीमित नहीं रहता। अगर आईपीओ लिस्टिंग के बाद अच्छा प्रदर्शन करता है, तो निवेशकों को शॉर्ट टर्म गेन के साथ-साथ लॉन्ग टर्म वैल्यू का भी फायदा मिल सकता है। वहीं, पेरेंट कंपनी के शेयर रखने वाले निवेशकों को यह एहसास भी होता है कि कंपनी उन्हें अपने विकास की अगली यात्रा में शामिल कर रही है। शेयरहोल्डर कोटा आकर्षक जरूर है, लेकिन निवेश से पहले कंपनी के फाइनेंशियल्स, बिजनेस मॉडल और ग्रोथ प्लान को समझना जरूरी है। सिर्फ कोटे के भरोसे निवेश करना समझदारी नहीं होगी। सही जानकारी और रणनीति के साथ किया गया निवेश ही असली मुनाफा दिला सकता है।
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